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पाकिस्तान को एमजे अकबर की सख्त चेतावनी, सिंधु जल विवाद पर बोले- ‘खून और पानी एक साथ नहीं बहेंगे’

 

सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव के बीच पूर्व विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने पाकिस्तान को सख्त संदेश दिया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की ओर से सिंधु नदी के पानी को लेकर दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अकबर ने कहा कि पाकिस्तान को पानी की एक-एक बूंद की चिंता है, लेकिन भारत की चिंता उन भारतीयों के खून की हर बूंद को लेकर है, जो पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद में बहा है।

एमजे अकबर ने साफ शब्दों में कहा कि पाकिस्तान सिंधु नदी के पानी को अपनी ‘रेड लाइन’ बता सकता है, लेकिन भारत का रुख भी स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के लिए पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और उसे अपने किए का जवाब देना होगा।

अकबर ने कहा, “खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।” उन्होंने यह टिप्पणी पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर की। उनके बयान को सिंधु जल संधि और भारत-पाकिस्तान संबंधों में जारी तनाव के संदर्भ में देखा जा रहा है।

मौलाना फजलुर रहमान के बयान का किया जिक्र

एमजे अकबर ने पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान के बयानों का उल्लेख करते हुए कहा कि पाकिस्तान की राजनीति और सत्ता व्यवस्था को लेकर वहां के नेताओं की ओर से ही कई गंभीर सवाल उठाए जाते रहे हैं।

अकबर ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर पर भी निशाना साधा। उन्होंने मौलाना फजलुर रहमान के उस कथित बयान का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व को कोई बयान देने से पहले ‘कुल्ला’ करने की नसीहत दी थी। अकबर के मुताबिक, इस टिप्पणी का मकसद पाकिस्तान के नेतृत्व पर झूठ बोलने का आरोप लगाना था।

बलूचिस्तान को लेकर भी किया बड़ा दावा

पूर्व विदेश राज्य मंत्री ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान क्षेत्र की स्थिति को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान के बड़े हिस्से में इस्लामाबाद का प्रभाव और नियंत्रण कमजोर हो चुका है।

अकबर ने दावा किया कि बलूचिस्तान का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा पाकिस्तान के प्रभावी नियंत्रण से बाहर है। उन्होंने इसे पाकिस्तान की आंतरिक कमजोरी का संकेत बताते हुए कहा कि वहां लंबे समय से असंतोष और संघर्ष की स्थिति बनी हुई है।

हालांकि, बलूचिस्तान की स्थिति को लेकर अलग-अलग पक्षों के दावे और आंकड़े सामने आते रहे हैं।

‘स्वतंत्रता दिवस पर बिखर रहा पाकिस्तान’

एमजे अकबर ने पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस समय देश अपना स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, उसी समय उसके सामने कई आंतरिक चुनौतियां खड़ी हैं।

उन्होंने पाकिस्तान को अपनी किताब में इस्तेमाल किए गए ‘जेली स्टेट’ के विचार से जोड़ते हुए कहा कि ऐसा देश न तो पूरी तरह स्थिर होता है और न ही आसानी से समाप्त होता है। उनके अनुसार, पाकिस्तान की वास्तविक स्थिति को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर, खैबर पख्तूनख्वा, सिंध और बलूचिस्तान में रहने वाले लोग बेहतर तरीके से समझते हैं।

अकबर ने पाकिस्तान की सेना पर इन क्षेत्रों में दमन और कठोर कार्रवाई के आरोप लगाते हुए कहा कि वहां के लोगों के बीच असंतोष की भावना मौजूद है।

भारत-पाकिस्तान संबंधों में बढ़ा तनाव

सिंधु जल संधि लंबे समय से भारत और पाकिस्तान के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता रही है। लेकिन आतंकवाद और सीमा पार तनाव के कारण दोनों देशों के रिश्तों में लगातार तल्खी बढ़ती रही है।

इसी पृष्ठभूमि में सिंधु नदी के पानी को लेकर पाकिस्तान की ओर से आने वाले बयान भारत के लिए बेहद संवेदनशील माने जा रहे हैं। एमजे अकबर के ताजा बयान ने एक बार फिर इस मुद्दे को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

उनका संदेश स्पष्ट था कि भारत आतंकवाद और पानी के मुद्दे को अलग-अलग करके नहीं देखता। अकबर के मुताबिक, पाकिस्तान को भारतीय खून की कीमत और आतंकवाद के लिए अपनी जवाबदेही को भी समझना होगा।

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