ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत पहुंचे मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के एक बयान को लेकर पाकिस्तान में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। एक इंटरव्यू के दौरान उनसे पहलगाम आतंकी हमले में पाकिस्तान की कथित भूमिका को लेकर सवाल किया गया। अनवर इब्राहिम ने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार पाकिस्तान सरकार की आतंकवाद में संलिप्तता को लेकर कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है।
मलेशियाई प्रधानमंत्री के इस बयान को पाकिस्तान के नेताओं ने अपने पक्ष में माना है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने अनवर इब्राहिम की टिप्पणी का स्वागत करते हुए भारत पर कई आरोप लगाए।
बिलावल भुट्टो ने भारत पर लगाए आरोप
अनवर इब्राहिम के बयान के बाद बिलावल भुट्टो जरदारी ने कहा कि इस घटनाक्रम से भारत की स्थिति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमजोर हुई है। उन्होंने दावा किया कि भारत ने गलत आधार पर पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की थी।
बिलावल ने भारत से युद्धविराम के दौरान किए गए कथित वादों को पूरा करने और पाकिस्तान के साथ सभी लंबित मुद्दों पर बातचीत शुरू करने की अपील की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत के जरिए क्षेत्र में शांति, स्थिरता और आर्थिक प्रगति का रास्ता तैयार किया जा सकता है।
मलेशियाई PM ने क्या कहा?
अनवर इब्राहिम ने एक इंटरव्यू में बताया कि मलेशिया की सुरक्षा एजेंसियों की ओर से उन्हें ऐसी कोई जानकारी नहीं दी गई है, जिससे पाकिस्तान सरकार की आतंकवादी गतिविधियों में प्रत्यक्ष भूमिका साबित होती हो।
उनसे पश्चिम एशिया में इजरायल की सैन्य कार्रवाई और इसे राज्य प्रायोजित आतंकवाद कहे जाने से जुड़े सवाल पर भी प्रतिक्रिया मांगी गई। अनवर इब्राहिम ने गाजा के संदर्भ में इसे राज्य आतंकवाद के तौर पर देखने की बात कही।
उन्होंने कहा कि फिलिस्तीन का मुद्दा नया नहीं है और इस क्षेत्र में लंबे समय से संघर्ष की स्थिति बनी हुई है।
ब्रिक्स घोषणा में पहलगाम हमले की निंदा
वहीं, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान जारी नई दिल्ली घोषणा में 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की गई। घोषणा में आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की जरूरत बताई गई।
ब्रिक्स देशों ने आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर जोर देते हुए आतंकवादियों की सीमा पार आवाजाही, आतंकवाद की फंडिंग और आतंकियों को सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई की आवश्यकता बताई।
घोषणा में यह भी कहा गया कि आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समुदाय से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। आतंकवादी गतिविधियों में शामिल लोगों और उन्हें समर्थन देने वालों को कानून के तहत जवाबदेह बनाए जाने पर भी जोर दिया गया।
आतंकवाद के खिलाफ सहयोग बढ़ाने पर जोर
ब्रिक्स घोषणा में काउंटर-टेररिज्म वर्किंग ग्रुप और उसके तहत काम करने वाले विभिन्न उप-समूहों की गतिविधियों का स्वागत किया गया। सदस्य देशों ने आतंकवाद से निपटने के लिए पहले से मौजूद ब्रिक्स रणनीति और एक्शन प्लान के आधार पर आपसी सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई।
सदस्य देशों ने आतंकवाद के खिलाफ सूचना साझा करने, सहयोग बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वय मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया।
संयुक्त राष्ट्र के स्तर पर भी पहल की अपील
ब्रिक्स देशों ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद से जुड़े मुद्दों पर संयुक्त राष्ट्र के ढांचे के भीतर व्यापक सम्मेलन को जल्द अंतिम रूप देने और उसे अपनाने की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की।
इस पूरे घटनाक्रम में एक ओर मलेशियाई प्रधानमंत्री का पाकिस्तान की कथित भूमिका पर दिया गया बयान चर्चा में है, वहीं दूसरी ओर ब्रिक्स घोषणा में पहलगाम हमले की स्पष्ट निंदा और आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई पर जोर भारत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Zaman Times