मिडिल ईस्ट में हालिया संघर्ष को लेकर ईरान ने बड़ा दावा किया है। ईरान की ओर से जारी सैटेलाइट तस्वीरों में कहा गया है कि उसने अमेरिका के कई सैन्य ठिकानों और रणनीतिक संसाधनों को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। इन तस्वीरों के सामने आने के बाद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने 100 से अधिक सैटेलाइट इमेज जारी की हैं, जिनमें अमेरिकी सेना के कम से कम 15 ठिकानों पर हमलों के निशान दिखाई देने का दावा किया गया है। बताया जा रहा है कि इन हमलों में करीब 228 इमारतें और कई सैन्य उपकरण प्रभावित हुए हैं। इससे पहले अमेरिकी प्रशासन ने अपने नुकसान को सीमित बताया था, लेकिन नई तस्वीरों के बाद नुकसान को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
कई अहम सैन्य संसाधनों को नुकसान पहुंचने का दावा
ईरान के दावों के अनुसार हमलों में अमेरिकी सेना के हैंगर, बैरक, ईंधन डिपो, रडार सिस्टम, एयर डिफेंस यूनिट और कम्युनिकेशन सेंटर प्रभावित हुए हैं। कहा जा रहा है कि कुछ ठिकाने अस्थायी रूप से निष्क्रिय भी हो गए।
बताया जा रहा है कि इस संघर्ष की कुल लागत अब तक लगभग 50 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सैटेलाइट तस्वीरों में दिखाए गए नुकसान का विश्लेषण किया गया है और उन्हें अब तक का सबसे विस्तृत सैन्य नुकसान आकलन माना जा रहा है।
बहरीन, कुवैत और कतर के ठिकानों पर असर
दावों के मुताबिक बहरीन स्थित अमेरिकी पांचवें बेड़े के मुख्यालय को नुकसान पहुंचा है। कुवैत के अली अल-सलेम, कैंप आरिफजान और कैंप ब्यूहरिंग जैसे ठिकाने भी प्रभावित बताए गए हैं।
इसके अलावा पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम, ईंधन भंडारण केंद्र और पावर प्लांट को भी नुकसान होने की बात कही गई है। कतर के अल-उदीद एयरबेस में सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेंटर और जॉर्डन व यूएई में THAAD रडार सिस्टम प्रभावित होने का दावा किया गया है।
सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर अमेरिकी ई-3 सेंट्री कमांड विमान और एक रीफ्यूलिंग टैंकर के नष्ट होने की भी चर्चा है।
ड्रोन और लड़ाकू विमानों के नुकसान की रिपोर्ट
रिपोर्ट्स में कहा गया है कि युद्ध के दौरान अमेरिका ने कई ड्रोन और फाइटर जेट भी खो दिए। इनमें MQ-9 रीपर ड्रोन और अत्याधुनिक MQ-4C ट्राइटन ड्रोन शामिल बताए गए हैं। साथ ही चार F-15E स्ट्राइक ईगल विमानों के नष्ट होने का भी दावा किया गया है।
दावों के अनुसार संघर्ष में अमेरिकी सैनिकों की मौत और सैकड़ों के घायल होने की भी खबर है। हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हुई है।
युद्ध की लागत बढ़ने की आशंका
विश्लेषकों का मानना है कि यदि सैन्य ठिकानों और उपकरणों की मरम्मत या पुनर्निर्माण करना पड़ा, तो अमेरिका को 40 से 50 अरब डॉलर तक खर्च करने पड़ सकते हैं। इसी बीच पेंटागन द्वारा 2027 के लिए भारी रक्षा बजट की मांग किए जाने की भी चर्चा है।
हालांकि अमेरिका की ओर से अभी तक इन सभी दावों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव वैश्विक राजनीति और सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
Zaman Times