अमेरिका में वीजा धोखाधड़ी से जुड़े एक बड़े मामले का खुलासा हुआ है, जिसमें 10 भारतीय नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एक आरोपी को भारत भेज दिया गया। जांच एजेंसियों के मुताबिक इन लोगों पर फर्जी सशस्त्र डकैती की घटनाएं करवाकर आव्रजन लाभ हासिल करने की साजिश रचने का आरोप है।
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने दुकानों में नकली डकैती की घटनाओं को अंजाम दिया, ताकि दुकानदार या वहां काम करने वाले लोग खुद को अपराध का पीड़ित बताकर अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम के तहत विशेष वीजा के लिए आवेदन कर सकें। अमेरिका में U Non-Immigrant Visa ऐसी ही श्रेणी का वीजा है, जो गंभीर अपराध के पीड़ितों को दिया जाता है, बशर्ते वे जांच एजेंसियों की मदद करें।
यह पूरा मामला साल 2023 में शुरू हुआ था। उस दौरान मैसाचुसेट्स में कई शराब की दुकानों और फास्ट-फूड रेस्तरां में सशस्त्र डकैती की घटनाएं सामने आईं। हर घटना का तरीका लगभग एक जैसा था। एक व्यक्ति दुकान में घुसकर बंदूक दिखाकर कर्मचारियों या मालिकों को धमकाता और कैश लेकर फरार हो जाता। ये पूरी घटना सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो जाती थी।
जांच में यह भी सामने आया कि कथित पीड़ित घटना के तुरंत बाद पुलिस को सूचना नहीं देते थे, बल्कि करीब 5 मिनट या उससे अधिक इंतजार करते थे, ताकि आरोपी सुरक्षित रूप से वहां से निकल जाए। बाद में पुलिस को सूचना दी जाती थी, जिससे मामला असली डकैती जैसा लगे।
आगे की जांच में पता चला कि ये सभी घटनाएं असल में एक साजिश का हिस्सा थीं। इस योजना का संचालन रामभाई पटेल और उसके साथियों द्वारा किया जा रहा था। आरोप है कि योजना में शामिल होने के लिए कुछ कथित पीड़ितों ने पैसे दिए, जबकि मुख्य आरोपी दुकानदारों को उनकी दुकानों का इस्तेमाल फर्जी डकैती के लिए करने के बदले पैसे देता था।
इस मामले में जितेंद्र कुमार पटेल, महेश कुमार पटेल, संजय कुमार पटेल, अमिताबेन पटेल, संगीताबेन पटेल और मितुल पटेल को मैसाचुसेट्स में गिरफ्तार किया गया। वहीं रमेशभाई पटेल, रोनाकुमार पटेल, सोनल पटेल और मिनकेश पटेल को केंटकी, मिसौरी और ओहियो राज्यों से पकड़ा गया। सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया गया है।
अधिकारियों के अनुसार मुख्य आरोपी रामभाई पटेल और भागने में मदद करने वाले ड्राइवर पर पहले भी आरोप लगाए जा चुके हैं और उन्हें दोषी ठहराया गया था। इस पूरे मामले में आरोपियों पर वीजा धोखाधड़ी की साजिश रचने का आरोप है। यदि दोष सिद्ध होता है तो उन्हें अधिकतम 5 साल की जेल और 2,50,000 डॉलर तक का जुर्माना हो सकता है।
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