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Watch: तुर्किए संसद में मारपीट, गरमागरम बहस के बीच हालात बेकाबू

 

तुर्किए की संसद में बुधवार (11 फरवरी 2026) को उस वक्त हालात बेकाबू हो गए, जब सत्तापक्ष और विपक्ष के सांसद आमने-सामने आ गए। राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन के हालिया कैबिनेट फेरबदल को लेकर शुरू हुई बहस अचानक हाथापाई में बदल गई। संसद के भीतर लात-घूंसे चलने तक की नौबत आ गई और कार्यवाही कुछ समय के लिए ठप हो गई।


क्या था विवाद का कारण?

विवाद की जड़ इस्तांबुल के चीफ प्रॉसिक्यूटर अकिन गुरलेक को देश का नया न्याय मंत्री बनाए जाने का फैसला था। विपक्षी सांसदों ने इस नियुक्ति का कड़ा विरोध किया। उनका आरोप है कि गुरलेक ने अपने पिछले पद पर रहते हुए विपक्षी नेताओं के खिलाफ राजनीतिक मकसद से मामले दर्ज किए थे।

जब उन्हें न्याय मंत्री के रूप में शपथ दिलाई जानी थी, तब विपक्ष ने संसद में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान सत्ता पक्ष के सांसद भी जवाब में आगे आए और देखते ही देखते तीखी नारेबाजी धक्का-मुक्की में बदल गई। कुछ सांसदों को एक-दूसरे पर हाथ उठाते और मारपीट करते देखा गया। सुरक्षाकर्मियों को स्थिति संभालने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा।


विपक्ष के आरोप और सरकार का जवाब

मुख्य विपक्षी दल रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी (CHP) का कहना है कि अकिन गुरलेक की नियुक्ति न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती है। उनका आरोप है कि गुरलेक ने इस्तांबुल में अपने कार्यकाल के दौरान विपक्षी नेताओं के खिलाफ पक्षपातपूर्ण कार्रवाई की।

हालांकि, एर्दोगन सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है। सरकार का कहना है कि न्यायपालिका स्वतंत्र रूप से काम करती है और नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह संवैधानिक है।


हंगामे के बीच शपथ ग्रहण

भारी विरोध और हंगामे के बावजूद अकिन गुरलेक ने न्याय मंत्री पद की शपथ ले ली। कैबिनेट में अन्य बदलावों के तहत मुस्तफा सिफ्टसी को नया आंतरिक मंत्री बनाया गया है, जो पहले एर्ज़ुरम प्रांत के गवर्नर रह चुके हैं।


तनावपूर्ण राजनीतिक माहौल

यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब तुर्किए का राजनीतिक माहौल पहले से ही तनावपूर्ण है। विपक्ष के कई वरिष्ठ नेता कानूनी मामलों का सामना कर रहे हैं, जिनमें इस्तांबुल के मेयर और एर्दोगन के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी एक्रेम इमामोग्लू का नाम भी शामिल है।

संसद में हुई यह झड़प देश की राजनीति में बढ़ते ध्रुवीकरण और टकराव की तस्वीर पेश करती है।

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