कई महीनों से जारी तनाव और बातचीत के बाद अमेरिका और ईरान के बीच समझौते को अंतिम रूप दे दिया गया है। दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व ने समझौता ज्ञापन (MoU) पर आधिकारिक हस्ताक्षर किए, जिसके साथ इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई।
जानकारी के अनुसार, दोनों पक्षों ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत समझौते को औपचारिक मंजूरी दी। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि हस्ताक्षर के बाद इस समझौते की प्रतियां संबंधित देशों और मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पक्षों तक भी पहुंचा दी गई हैं।
इससे पहले उच्च स्तरीय प्रतिनिधियों के बीच डिजिटल माध्यम से प्रारंभिक सहमति दर्ज की गई थी। अधिकारियों के अनुसार, इस प्रक्रिया ने लंबे समय से जारी गतिरोध को कम करने की दिशा में अहम भूमिका निभाई है।
जिनेवा में आगे की वार्ता जारी रहेगी
समझौते के बावजूद दोनों देशों के प्रतिनिधियों की प्रस्तावित बैठक का कार्यक्रम अभी भी बना हुआ है। बताया गया है कि आगामी वार्ता का उद्देश्य नए समझौते पर हस्ताक्षर नहीं बल्कि पहले से तय बिंदुओं और आगे की प्रक्रिया पर चर्चा करना होगा। बैठक को लेकर अंतिम निर्णय संबंधित पक्षों की सहमति के बाद लिया जाएगा।
ईरान की प्राथमिकताएं क्या हैं?
ईरानी पक्ष ने संकेत दिया है कि वह तेल निर्यात से जुड़े प्रतिबंधों और आर्थिक पहुंच से संबंधित मुद्दों पर स्पष्ट व्यवस्था चाहता है। साथ ही यह भी कहा गया कि वित्तीय और आर्थिक प्रक्रियाओं में मौजूद बाधाओं को कम करने को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं।
समझौते के बाद ईरान ने अगले 60 दिनों तक दोनों देशों के बीच संतुलित और संयमित रवैया बनाए रखने की बात कही है। इसके तहत ऐसे किसी भी राजनीतिक, आर्थिक या सैन्य कदम से बचने पर जोर दिया गया है जो समझौते के लागू होने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता हो।
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