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आंध्र प्रदेश में तूफान से बिगड़े हालात, 7 लोगों की गई जान और हजारों करोड़ का नुकसान; प्रभावितों को राहत देंगे CM नायडू

 

आंध्र प्रदेश में आए चक्रवात अरनब ने कई जिलों में भारी नुकसान पहुंचाया है। तूफान के कारण जहां बड़ी संख्या में पेड़ और बिजली के खंभे गिर गए, वहीं किसानों की फसलें भी प्रभावित हुई हैं। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने 29 अक्टूबर 2026 को प्रभावित इलाकों का दौरा कर हालात का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने क्षतिग्रस्त फसलों और बुनियादी सुविधाओं को हुए नुकसान का निरीक्षण किया। साथ ही राहत शिविरों में रह रहे लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार की ओर से पहले से की गई तैयारियों और सावधानियों के चलते तूफान के प्रभाव को कम करने में मदद मिली। हालांकि, तमाम एहतियाती उपायों के बावजूद इस प्राकृतिक आपदा में सात लोगों की जान चली गई। उन्होंने प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता देने का भरोसा भी दिलाया।

तूफान से करीब 4,600 करोड़ रुपये का नुकसान

मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कोनसीमा जिले के मुम्मिडिवरम विधानसभा क्षेत्र के गच्चकायालपोर गांव में मीडिया से बातचीत के दौरान तूफान से हुए नुकसान की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शुरुआती आकलन के मुताबिक राज्य को लगभग 4,600 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। हालांकि, विस्तृत सर्वेक्षण के बाद यह आंकड़ा बढ़ सकता है।

नायडू के मुताबिक, केंद्र सरकार को नुकसान की शुरुआती रिपोर्ट भेज दी गई है। प्रभावित क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए केंद्रीय टीमें 30 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश पहुंचेंगी। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी बातचीत की है। इस दौरान राज्य में राहत और बचाव कार्यों की जानकारी साझा की गई।

किसानों और प्रभावित परिवारों के लिए आर्थिक सहायता

चक्रवात से कृषि और बागवानी क्षेत्र को हुए नुकसान को देखते हुए मुख्यमंत्री ने किसानों के लिए सहायता का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि नारियल के प्रत्येक क्षतिग्रस्त पेड़ के लिए 1,500 रुपये की सहायता दी जाएगी। ऑयल पाम के पेड़ों के नुकसान पर भी प्रति पेड़ 1,500 रुपये दिए जाएंगे।

इसके अलावा पुनर्वास केंद्रों से अपने घर लौटने वाले प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। प्रत्येक परिवार को 25 किलो चावल, जरूरी घरेलू सामान का एक पैकेट और आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि किसानों की फसलों का बीमा कराया गया है। जिन किसानों की पैदावार प्रभावित हुई है, उन्हें बीमा नियमों के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा। कृषि और बागवानी फसलों को हुए नुकसान का सर्वे पूरा होने के बाद सहायता राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

कोनसीमा में 8 हजार बिजली के खंभे गिरे

अरनब तूफान का असर बिजली व्यवस्था पर भी पड़ा है। मुख्यमंत्री के अनुसार, कोनसीमा जिले में लगभग 8,000 बिजली के खंभे गिर गए हैं। इससे कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई है।

बिजली व्यवस्था को जल्द सामान्य बनाने के लिए सरकार ने बड़े स्तर पर कर्मचारियों और संसाधनों को लगाने का फैसला किया है। नायडू ने बताया कि तेलंगाना सरकार से बातचीत कर 1,000 बिजली कर्मचारियों को भेजने का अनुरोध किया गया है। जरूरत पड़ने पर कर्नाटक और तमिलनाडु से भी अतिरिक्त कर्मचारियों की मदद ली जाएगी।

इसके साथ ही गिरे हुए पेड़ों को हटाने और क्षतिग्रस्त सड़कों को साफ करने का काम लगातार जारी है। सरकार दूरसंचार सेवाओं को भी जल्द बहाल करने की कोशिश कर रही है।

कोनसीमा और पश्चिम गोदावरी में सबसे ज्यादा असर

मुख्यमंत्री ने बताया कि अरनब तूफान से कोनसीमा और पश्चिम गोदावरी जिले सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों को पहले से सतर्क कर दिया गया था। जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों के साथ लगातार संपर्क बनाकर स्थिति की निगरानी की गई।

श्रीकाकुलम से कृष्णा जिले तक विभिन्न क्षेत्रों के हालात पर नजर रखी गई। राहत और बचाव कार्यों में अलग-अलग विभागों के बीच तालमेल बनाया गया। इसके लिए रियल टाइम गवर्नेंस सोसाइटी (RTGS) के माध्यम से लगातार समीक्षा भी की गई।

नायडू ने बताया कि तूफान से पहले ही संवेदनशील स्थानों पर मशीनें और राहत दल तैनात कर दिए गए थे। जहां पेड़ गिरने की आशंका थी, वहां तत्काल कार्रवाई की गई। तकनीक के इस्तेमाल से जलाशयों के तटबंधों को टूटने से बचाने में भी मदद मिली।

पुराने तूफानों से सबक लेकर सरकार ने की तैयारी

चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि आंध्र प्रदेश पहले भी कई बड़े चक्रवातों का सामना कर चुका है। करीब 30 साल पहले 6 नवंबर को आए भीषण तूफान ने इसी क्षेत्र में भारी तबाही मचाई थी। इसके अलावा हुदहुद, तितली और मोंथा जैसे चक्रवातों ने भी राज्य को काफी नुकसान पहुंचाया था।

उन्होंने दिविसीमा में करीब 70 साल पहले आए विनाशकारी तूफान का भी जिक्र किया, जिसमें हजारों लोग लापता हो गए थे। मुख्यमंत्री के मुताबिक, पिछली प्राकृतिक आपदाओं से मिले अनुभवों के आधार पर इस बार पहले से तैयारियां की गई थीं।

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं को रोकना संभव नहीं है, लेकिन बेहतर योजना और समय पर कार्रवाई से जान-माल के नुकसान को कम किया जा सकता है। सरकार ने इसी उद्देश्य से प्रशासन को लगातार सतर्क रखा था।

राज्य की आर्थिक स्थिति पर भी बढ़ा दबाव

मुख्यमंत्री ने कहा कि आंध्र प्रदेश पहले से आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में चक्रवात से हुआ भारी नुकसान राज्य की अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डालेगा। उन्होंने केंद्र सरकार से मिल रहे सहयोग का भी उल्लेख किया।

नायडू ने कहा कि सरकार प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने, बिजली और संचार व्यवस्था बहाल करने तथा किसानों को मुआवजा देने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि राहत कार्यों में किसी तरह की लापरवाही न हो और प्रभावित परिवारों तक जल्द से जल्द सहायता पहुंचाई जाए।

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