मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप के सीजफायर वाले दावे को ईरान ने सिरे से खारिज कर दिया है। तेहरान ने साफ कहा है कि युद्धविराम की कोई अपील नहीं की गई और ऐसा दावा पूरी तरह “झूठा और निराधार” है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने सरकारी मीडिया के जरिए बयान जारी कर कहा कि ट्रंप का यह दावा वास्तविकता से परे है और इसका कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है। इस प्रतिक्रिया से दोनों देशों के बीच जारी बयानबाजी और तेज हो गई है।
“अप्रैल फूल” वाला पलटवार
ईरान ने ट्रंप के उस दावे पर भी कटाक्ष किया, जिसमें उन्होंने देश में सत्ता परिवर्तन की बात कही थी। ईरान ने तंज कसते हुए कहा कि किसी देश का राष्ट्रपति ट्वीट से नहीं बदलता।
साथ ही यह स्पष्ट किया गया कि मसूद पेज़ेश्कियन पहले भी राष्ट्रपति थे और अब भी उसी पद पर हैं, यानी देश में किसी तरह का बदलाव नहीं हुआ है।
ट्रंप ने क्या कहा था?
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दावा किया था कि ईरान की “नई सत्ता” ने उनसे संपर्क कर युद्धविराम की गुजारिश की है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर Strait of Hormuz को फिर से खोला जाता है, तो अमेरिका इस प्रस्ताव पर विचार कर सकता है।
ईरान का कड़ा रुख
दूसरी ओर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने एक इंटरव्यू में साफ कहा कि ईरान किसी भी स्थिति के लिए तैयार है और उसे धमकाने की कोशिश न की जाए। उन्होंने संकेत दिया कि देश युद्ध से पीछे हटने के मूड में नहीं है।
सहयोगी देशों का रुख
इस पूरे घटनाक्रम के बीच United Kingdom, France और Spain जैसे कई देशों ने अमेरिका का साथ देने से इनकार कर दिया है। इस पर ट्रंप ने नाराजगी जताते हुए कहा कि तेल संकट झेल रहे देश या तो अमेरिका से तेल खरीदें या खुद आगे बढ़कर स्थिति का सामना करें।
बढ़ता तनाव, अनिश्चित भविष्य
लगातार विरोधाभासी बयानों और सख्त रुख के चलते मिडिल ईस्ट का माहौल और तनावपूर्ण होता जा रहा है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि हालात कब सामान्य होंगे, लेकिन कूटनीतिक टकराव और बयानबाजी के कारण संकट और गहराने के संकेत मिल रहे हैं।
Zaman Times