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रूसी तेल खरीद पर बढ़ा असमंजस, अमेरिकी समयसीमा खत्म होने से भारतीय रिफाइनरियों की चिंता तेज

 

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। अमेरिका की ओर से रूस से कच्चे तेल के आयात पर दी गई छूट की समयसीमा समाप्त होने के करीब है, जिससे भारत समेत कई देशों की तेल रिफाइनरी कंपनियों की चिंता बढ़ गई है।

रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा कुछ देशों को रूस से कच्चे तेल की खरीद पर अस्थायी छूट दी गई थी, जिसकी डेडलाइन 16 मई 2026 को खत्म हो रही है। इस समयसीमा के बाद यदि छूट को आगे नहीं बढ़ाया जाता, तो रूस से तेल आयात करने वाली भारतीय कंपनियों को नए ऑर्डर में कटौती करनी पड़ सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर रूस से आने वाले कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होती है, तो भारत को वैकल्पिक स्रोतों से महंगे दामों पर तेल खरीदना पड़ सकता है, जिससे देश की ऊर्जा लागत में बढ़ोतरी की संभावना है।

आंकड़ों के मुताबिक, मई महीने में अब तक भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात रिकॉर्ड स्तर के करीब रहा है, लेकिन डेडलाइन खत्म होने के बाद नए शिपमेंट कम होने पर मासिक औसत में गिरावट आ सकती है।

दूसरी ओर, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी चिंताओं के बीच वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पहले से ही दबाव में है। भारत, जो दुनिया का एक बड़ा तेल आयातक देश है, इन हालातों से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में शामिल है।

फिलहाल बाजार की नजर इस बात पर टिकी है कि अमेरिका इस छूट को आगे बढ़ाता है या नहीं, क्योंकि इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और भारत की ऊर्जा नीति पर पड़ सकता है।

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