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मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान-शाही ईदगाह मामले में फिर वार्ता, समाधान पर होगी चर्चा

 

मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान और शाही ईदगाह मस्जिद से जुड़े विवाद में मंगलवार को एक बार फिर समझौते की कोशिश की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत होने वाली इस वार्ता में हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। दोनों पक्ष बातचीत के जरिए लंबे समय से चले आ रहे विवाद का कोई रास्ता निकालने का प्रयास करेंगे।

यह दोनों पक्षों के बीच समझौते की दिशा में होने वाली तीसरी वार्ता होगी। इससे पहले हुई बैठकों में दोनों पक्षों ने अपने-अपने विचार सामने रखे थे, लेकिन किसी अंतिम सहमति पर नहीं पहुंचा जा सका।

पिछली बैठक में क्या हुआ था?

पिछली बातचीत के दौरान हिंदू पक्ष की ओर से एक प्रस्ताव रखा गया था। इसमें शाही ईदगाह मस्जिद को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने की बात कही गई थी। प्रस्ताव के तहत जमीन उपलब्ध कराने और नए निर्माण में सहयोग करने की बात भी सामने आई थी।

हालांकि मुस्लिम पक्ष की ओर से इस प्रस्ताव पर सहमति नहीं बनी। शाही ईदगाह कमेटी ने 1968 में हुए समझौते को आधार बताते हुए कहा कि वह उसी समझौते पर कायम है।

दो बार पहले भी हो चुकी है बातचीत

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाने के लिए पहले भी दो दौर की बैठक हो चुकी है।

हिंदू पक्ष के अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार, 4 जुलाई को हुई पहली बैठक में मुस्लिम पक्ष की अनुपस्थिति के कारण बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद 7 अगस्त की बैठक में दोनों पक्षों के प्रतिनिधि मौजूद हुए और उन्होंने अपने-अपने तर्क रखे।

हालांकि उस बैठक में भी विवाद को आपसी सहमति से समाप्त करने को लेकर कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका।

1968 के समझौते को लेकर मतभेद

विवाद में 1968 में हुए समझौते को लेकर दोनों पक्षों के बीच प्रमुख मतभेद है। मुस्लिम पक्ष इस समझौते को आधार मानता है, जबकि हिंदू पक्ष इसकी वैधता पर सवाल उठाता रहा है।

हिंदू पक्ष का कहना है कि 1968 के समझौते को अदालत में चुनौती दी गई है। मंगलवार की वार्ता में भी कानूनी दावों और आपत्तियों के आधार पर अपना पक्ष रखने की तैयारी है।

आगे भी सुप्रीम कोर्ट में हो सकती है बातचीत

अगर मंगलवार को होने वाली बातचीत से कोई समाधान नहीं निकलता है, तो समझौते की प्रक्रिया आगे भी जारी रह सकती है। जानकारी के मुताबिक 21, 22 और 23 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के स्तर पर भी दोनों पक्षों के बीच बातचीत प्रस्तावित है।

फिलहाल सभी की नजर मंगलवार की वार्ता पर है। यदि दोनों पक्ष किसी साझा समाधान पर पहुंचते हैं तो लंबे समय से चल रहे इस विवाद को लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर भी इसका असर पड़ सकता है।

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