बदायूं: जिले की कई गौशालाओं में गोवंशों की मौत की खबर सामने आने के बाद प्रशासन में हलचल बढ़ गई है। रविवार को म्याऊं, सलारपुर और समरेर ब्लॉक की गौशालाओं में बड़ी संख्या में गोवंशों के मरने की जानकारी सामने आई। हालांकि मृत गोवंशों की कुल संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं।
सबसे अधिक चर्चा म्याऊं ब्लॉक के अभिगांव स्थित गौशाला को लेकर है। स्थानीय स्तर पर यहां करीब 80 गोवंशों की मौत की बात कही जा रही है। वहीं सलारपुर ब्लॉक के ब्यौर गांव की गौशाला में करीब 20 और समरेर ब्लॉक की एक गौशाला में एक गोवंश की मौत की जानकारी सामने आई।
हालांकि प्रशासन की ओर से देर रात तक जिले में मृत गोवंशों की कुल संख्या की पुष्टि नहीं की गई थी। जिलाधिकारी अवनीश राय ने देर रात करीब 11 बजे अभिगांव की गौशाला पहुंचकर मौके का निरीक्षण किया और संबंधित अधिकारियों से जानकारी ली।
प्रशासन ने अभिगांव में 20 मौतों की पुष्टि की
जिलाधिकारी ने अभिगांव गौशाला में फिलहाल 20 गोवंशों की मौत की पुष्टि की है। अधिकारियों के मुताबिक, इनमें कुछ गोवंश बीमारी की वजह से भी प्रभावित थे।
बताया गया कि शनिवार को बीमारी के कारण छह गोवंशों की मौत हुई थी। वहीं करीब 60 गोवंश बीमार बताए गए थे। रविवार को इलाज के दौरान 14 और गोवंशों की मौत होने की जानकारी दी गई। इस तरह प्रशासन के अनुसार अभिगांव में कुल 20 मौतों की पुष्टि हुई है।
दूसरी ओर, स्थानीय स्तर पर इससे कहीं अधिक गोवंशों के मरने की चर्चा है। इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
बिना पोस्टमार्टम दफनाने का आरोप
मामले में यह आरोप भी सामने आया है कि कुछ मृत गोवंशों को पोस्टमार्टम कराए बिना ही गौशाला परिसर या उसके आसपास दफना दिया गया। इसके लिए जेसीबी के इस्तेमाल की बात भी कही जा रही है।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। प्रशासन की जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि कितने गोवंशों की मौत हुई और मृत पशुओं के निस्तारण की प्रक्रिया नियमों के अनुसार हुई या नहीं।
गौशाला के पुराने आंकड़ों को लेकर भी सवाल
अभिगांव गौशाला में गोवंशों की संख्या और उनके चारे पर खर्च को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक जुलाई में गौशाला में 558 गोवंश दर्ज थे। इनके चारे के लिए करीब 8.66 लाख रुपये खर्च किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
वहीं सितंबर में जिलाधिकारी के मुताबिक गौशाला में गोवंशों की संख्या घटकर करीब 428 रह गई। इसी अंतर को लेकर भी प्रशासनिक स्तर पर जानकारी जुटाई जा रही है कि संख्या में कमी की वजह क्या रही।
प्रदर्शन के दौरान विवाद की स्थिति
घटना की जानकारी सामने आने के बाद रविवार शाम राष्ट्रीय बजरंगदल के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी अभिगांव गौशाला पहुंचे। संगठन के प्रांत महामंत्री पंकज गुप्ता के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने वहां प्रदर्शन किया और गोवंशों की मौत के मामले में कार्रवाई की मांग उठाई।
इस दौरान मौके पर पहुंची चिकित्सकों की टीम के साथ कार्यकर्ताओं की झड़प होने की भी जानकारी सामने आई। स्थिति बिगड़ने पर प्रशासनिक अधिकारियों को हस्तक्षेप करना पड़ा।
एसडीएम ने संभाली स्थिति
मामले की जानकारी मिलने के बाद दातागंज के एसडीएम विनोद कुमार सिंह भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्थिति को नियंत्रित किया और संबंधित लोगों से बातचीत की।
एसडीएम ने भी गौशाला में गोवंशों की मौत की पुष्टि की, लेकिन उस समय मृत पशुओं की सटीक संख्या स्पष्ट नहीं की गई।
सलारपुर में भी करीब 20 मौतों की सूचना
सलारपुर ब्लॉक के ब्यौर गांव स्थित गौशाला में भी करीब 20 गोवंशों की मौत की जानकारी सामने आई है। अचानक बड़ी संख्या में गोवंशों की मौत के पीछे मौसम में बदलाव, बारिश और ठंड को संभावित कारणों में शामिल किया जा रहा है। हालांकि वास्तविक कारण जांच और चिकित्सकीय परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगा।
समरेर ब्लॉक की एक गौशाला में भी एक गोवंश की मौत की जानकारी सामने आई है।
जिले की सभी गौशालाओं में भेजी जा रही टीमें
जिलाधिकारी ने बताया कि जिले की सभी गौशालाओं की स्थिति की जानकारी लेने के लिए अलग-अलग टीमें भेजी गई हैं। इन टीमों के जरिए गोवंशों की संख्या, उनकी स्वास्थ्य स्थिति, चारे और देखभाल की व्यवस्था सहित अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है।
अभिगांव गौशाला का संचालन करने वाले NGO की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जिलाधिकारी के मुताबिक, यदि लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित NGO के खिलाफ FIR दर्ज कराने के साथ कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल प्रशासन का मुख्य फोकस मृत गोवंशों की वास्तविक संख्या और उनकी मौत के कारणों का पता लगाने पर है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
Zaman Times