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तारिक रहमान के सत्ता संभालते ही तीस्ता परियोजना पर चीन की दिलचस्पी बढ़ी, क्षेत्रीय राजनीति में नई सरगर्मी

 

बांग्लादेश में Tarique Rahman के प्रधानमंत्री पद संभालने के तुरंत बाद चीन ने तीस्ता नदी परियोजना को लेकर नई सक्रियता दिखाई है। ढाका स्थित चीनी राजदूत Yao Wen ने संकेत दिया है कि चीन और बांग्लादेश के बीच तीस्ता रिवर कॉम्प्रिहेंसिव मैनेजमेंट एंड रेस्टोरेशन प्रोजेक्ट पर लंबे समय से बातचीत चल रही है और इसे आगे बढ़ाने की उम्मीद है।

राजदूत ने बांग्लादेश के विदेश मंत्री Khalilur Rahman से मुलाकात के बाद कहा कि दोनों देश इस परियोजना पर फिर से काम शुरू करने को लेकर सकारात्मक हैं।


चीनी प्रधानमंत्री की बधाई और रणनीतिक संकेत

चीन के प्रधानमंत्री Li Qiang ने 17 फरवरी 2026 को तारिक रहमान को प्रधानमंत्री बनने पर बधाई संदेश भेजा। अपने संदेश में उन्होंने चीन और बांग्लादेश को पुराने मित्र और व्यापक रणनीतिक सहयोगी साझेदार बताया।

चीन ने हालिया बांग्लादेश चुनाव को लोकतंत्र की जीत करार देते हुए उच्च स्तरीय आदान-प्रदान जारी रखने की बात कही। साथ ही दोनों देशों के 51 वर्षों के कूटनीतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए आपसी सम्मान और सहयोग को रेखांकित किया।


बेल्ट एंड रोड और अन्य परियोजनाओं पर जोर

ली कियांग ने कहा कि वे नई सरकार के साथ मिलकर उच्च गुणवत्ता वाले बेल्ट एंड रोड सहयोग, व्यापार विस्तार और व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नए स्तर तक ले जाने के इच्छुक हैं।

चीन ने यह भी दोहराया कि वह बांग्लादेश के विकास कार्यक्रमों में समर्थन जारी रखेगा।


तीस्ता प्रोजेक्ट और भारत की चिंता

Teesta River पर प्रस्तावित परियोजना के लिए बांग्लादेश लगभग एक अरब डॉलर खर्च करने की योजना बना रहा है, जिसमें लगभग 85 प्रतिशत राशि चीन से ऋण के रूप में ली जा सकती है।

यह परियोजना भौगोलिक रूप से भारत के संवेदनशील “चिकन नेक” (सिलीगुड़ी कॉरिडोर) के करीब मानी जाती है। ऐसे में यदि चीन निर्माण गतिविधियों में प्रत्यक्ष रूप से शामिल होता है, तो यह भारत की रणनीतिक चिंताओं को बढ़ा सकता है।


क्षेत्रीय समीकरणों पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश की नई सरकार के शुरुआती संकेतों से यह स्पष्ट है कि वह चीन के साथ आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने के पक्ष में है। हालांकि, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ढाका भारत और चीन के बीच संतुलन कैसे साधता है।

तीस्ता परियोजना लंबे समय से भारत-बांग्लादेश संबंधों में भी एक संवेदनशील मुद्दा रही है। ऐसे में चीन की सक्रियता ने दक्षिण एशिया की कूटनीतिक हलचल को और तेज कर दिया है।

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