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6 मॉडल वार्डों में लागू होगी जीरो वेस्ट योजना, वाराणसी का लक्ष्य टॉप-5 स्वच्छ शहरों में जगह बनाना

 

स्वच्छता सर्वेक्षण में देश के शीर्ष पांच शहरों में जगह बनाने के लिए वाराणसी नगर निगम ने बड़ा कदम उठाया है। शहर में इंदौर मॉडल को अपनाते हुए छह चयनित वार्डों को पूरी तरह ‘जीरो वेस्ट ज़ोन’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इन वार्डों में कचरा प्रबंधन से लेकर निगरानी तक हर व्यवस्था हाईटेक होगी।

इंदौर मॉडल से मिली प्रेरणा

पिछले साल स्वच्छता व्यवस्था को समझने के लिए नगर निगम के अधिकारी, कर्मचारी और जनप्रतिनिधि इंदौर का अध्ययन दौरा कर चुके हैं। वहीं से मिले अनुभव के आधार पर वाराणसी में मॉडल वार्ड की योजना को जमीन पर उतारा जा रहा है। ये सभी वार्ड पहले से चयनित मॉडल वार्ड हैं, जहां पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर यह व्यवस्था लागू की जा रही है।

इन इलाकों में लागू होगी जीरो वेस्ट व्यवस्था

जीरो वेस्ट जोन बनने वाले वार्डों में नारायणपुर, डिठौरी महाल, चेतगंज, कालभैरव, पियरी कला और पिशाचमोचन शामिल हैं। इन क्षेत्रों में निकलने वाले कचरे का शत-प्रतिशत निस्तारण स्थानीय स्तर पर या प्रोसेसिंग प्लांट के माध्यम से किया जाएगा।

कचरे का होगा 100% निस्तारण

नगर निगम का लक्ष्य है कि इन मॉडल वार्डों से कोई भी कचरा खुले में न जाए। गीला और सूखा कचरा अलग-अलग एकत्र कर तुरंत प्रोसेस किया जाएगा। इससे लैंडफिल पर दबाव कम होगा और वार्ड पूरी तरह साफ-सुथरे बने रहेंगे।

हाईटेक निगरानी से चाक-चौबंद सफाई व्यवस्था

सफाई व्यवस्था की प्रभावी निगरानी के लिए सभी बीटों की जीआईएस मैपिंग की गई है। इससे सफाई कर्मचारियों की उपस्थिति और कार्यक्षेत्र पर डिजिटल नजर रखी जा रही है। इसके साथ ही शहर के कई चिन्हित स्थानों का सौंदर्यीकरण भी कराया गया है।

डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन पर सख्त निगरानी

डोर-टू-डोर कूड़ा उठान की व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए कूड़ा संग्रहण वाहनों में जीपीएस ट्रैकिंग लागू की गई है। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि कोई भी घर कलेक्शन से न छूटे। नागरिकों को भी जागरूक किया जा रहा है कि वे घर से ही कचरे को गीला और सूखा अलग करके दें।

नए वार्डों के लिए भी तैयार है प्लान

परिसीमन के बाद शहर में शामिल हुए नए इलाकों के लिए भी सफाई व्यवस्था का खाका तैयार कर लिया गया है। इन क्षेत्रों में दिसंबर 2025 से निजी एजेंसियों के माध्यम से डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन शुरू किया जाएगा। वर्तमान में शहर में प्रतिदिन 1200 टन से अधिक कचरा प्रोसेस करने की क्षमता विकसित की जा चुकी है, जो इस योजना को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।

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