नवरात्र की अष्टमी तिथि पर बलिया जिले में भक्ति और उत्साह का माहौल रहा। नगरीय क्षेत्र से लेकर ग्रामीण इलाकों तक स्थित देवी मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। माता रानी के जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। भक्तों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। देर रात तक दर्शन-पूजन का सिलसिला जारी रहा।
जिले के विभिन्न इलाकों में स्थापित दुर्गा पूजा पंडालों को समितियों ने इस बार थीम आधारित बनाया है। कहीं आदि कैलाश की भव्य झलक दिखी तो कहीं मां वैष्णो देवी की गुफा का अद्भुत नजारा। कई पंडालों में विद्युत चलायमान झांकियां लगाई गई हैं, जो श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींच रही हैं। समितियों ने सजावट और प्रकाश व्यवस्था में किसी तरह की कमी नहीं छोड़ी।
पूजा समितियों के सदस्यों ने बताया—भक्ति में समर्पण
बाल कमेटी दुर्गा जी मंदिर के सदस्य अमित गुप्ता ने बताया कि यह कमेटी करीब 75 साल पुरानी है, जो हर साल भव्य दुर्गा पूजनोत्सव का आयोजन करती है।बंगाली समिति के सचिव गौतम सन्याल ने कहा कि महाअष्टमी और संधि पूजा के दौरान भारी भीड़ उमड़ी। जय मां शेरावाली समिति के सदस्य रामजी जायसवाल ने बताया कि इस बार पंडाल को आदि कैलाश की थीम पर सजाया गया है।वहीं संजय कुमार ने कहा कि सभी समितियों का प्रयास है कि पंडाल को मंदिर जैसा स्वरूप देकर भक्तों को विशेष अनुभव कराया जा सके।
रसड़ा और रेवती में मेला बना आकर्षण का केंद्र
पूरे जिले में दुर्गा पूजा पंडालों के आसपास मेले का आयोजन किया गया है। इनमें रसड़ा और रेवती के मेले खास आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। यहां श्रद्धालु जहां पूजा-अर्चना कर रहे हैं, वहीं मेला घूमने और खरीदारी करने में भी जुटे हैं। बच्चों के लिए मिकी माउस और चरखी जैसी झूले हैं, तो युवाओं के लिए फास्ट फूड स्टॉल पर भीड़ लगी रही।लोग मेले में घूमते हुए मनपसंद व्यंजनों का स्वाद ले रहे हैं और धार्मिक उत्सव का भरपूर आनंद उठा रहे हैं।
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