भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया को बताया है कि वह दवा कंपनियों द्वारा डॉक्टरों को महंगे तोहफे, विदेश यात्राएं और अन्य सुविधाएं देकर अपनी दवाओं की बिक्री बढ़ाने पर रोक लगाने के लिए नए नियम बनाने पर विचार कर रही है। सरकार ने इसके लिए लगभग दो महीने का समय मांगा है।
सरकार की इस जानकारी को रिकॉर्ड में लेते हुए अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी है।
यह मामला फेडरेशन ऑफ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FMRAI) द्वारा 2021 में दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में मांग की गई है कि दवा कंपनियों की मार्केटिंग प्रथाओं को कानूनी रूप से बाध्यकारी बनाया जाए ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि कई दवा कंपनियां डॉक्टरों को गिफ्ट, ट्रैवल और अन्य सुविधाएं देकर अपनी दवाएं लिखवाती हैं। इसमें कोविड काल में लोकप्रिय हुई Dolo 650 को लेकर भी सवाल उठाए गए थे, जिसमें कहा गया था कि इसके प्रचार-प्रसार में अनियमितताएं हो सकती हैं।
कोर्ट में यह भी बताया गया कि सरकार ने पहले से यूनिफॉर्म कोड ऑफ फार्मास्यूटिकल मार्केटिंग प्रैक्टिसेज (UCPMP) बनाया हुआ है, लेकिन यह कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। इस कोड में डॉक्टरों को उपहार देने और अनुचित लाभ पहुंचाने पर रोक का प्रावधान है, लेकिन इसके उल्लंघन पर सख्त कानूनी कार्रवाई का स्पष्ट ढांचा नहीं है।
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की थी कि डॉक्टरों को जहां तक संभव हो, जेनेरिक दवाएं लिखने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, ताकि मरीजों पर आर्थिक बोझ कम हो सके।
सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट से दो महीने का समय मांगा है ताकि प्रस्तावित नियमों पर अंतिम निर्णय लिया जा सके। कोर्ट ने इसे स्वीकार करते हुए याचिकाकर्ताओं से भी अपने सुझाव सरकार के साथ साझा करने को कहा है।
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