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मेरठ के शोएब हुसैन की अनूठी पहल, खादी को मॉडर्न लुक देकर युवाओं को कर रहे आकर्षित

 

मेरठ: खादी को अब सिर्फ पारंपरिक पहनावे तक सीमित रखने के बजाय आधुनिक फैशन का हिस्सा बनाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। मेरठ के युवा उद्यमी शोएब हुसैन अपने ब्रांड के जरिए खादी को नया रूप देने में जुटे हैं। उनका लक्ष्य ऐसे डिजाइनर कपड़े तैयार करना है, जिन्हें युवा अपनी रोजमर्रा की जिंदगी से लेकर खास मौकों तक पहन सकें। इसके लिए वह हैंडलूम फैब्रिक में आकर्षक रंगों और आधुनिक डिजाइनों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

खादी एवं ग्रामोद्योग महोत्सव में भी खादी को नए अंदाज में पेश करने की यह पहल देखने को मिल रही है। शोएब अपने स्टार्टअप के माध्यम से भारतीय पारंपरिक कपड़ों को समकालीन फैशन से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। उनके डिजाइन किए गए कपड़ों को तैयार करने में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

बीटेक की पढ़ाई के साथ लंदन से सीखी पर्सनल स्टाइलिंग

शोएब हुसैन ने बीटेक की पढ़ाई करने के साथ लंदन से पर्सनल स्टाइलिंग का कोर्स भी किया है। इस दौरान फैशन और स्टाइलिंग के क्षेत्र में उनकी रुचि और बढ़ी। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपनी सोच को व्यवसाय का रूप देने का फैसला किया और एस.एच एसेंशियल्स नाम से अपना स्टार्टअप शुरू किया।

शोएब का मानना है कि भारतीय पारंपरिक कपड़ों, हस्तशिल्प और डिजाइन में अपार संभावनाएं हैं। भारत की सांस्कृतिक विरासत सदियों से अपनी अलग पहचान रखती है। हालांकि, पारंपरिक भारतीय डिजाइनों से मिलती-जुलती शैलियां दूसरे देशों में भी देखने को मिलती हैं। ऐसे में वह भारतीय कला और खादी को अपने ब्रांड की पहचान बनाकर आगे बढ़ाना चाहते हैं।

उनका प्रयास है कि खादी की पारंपरिक विशेषताओं को बरकरार रखते हुए इसे ऐसा आधुनिक रूप दिया जाए, जो आज की पीढ़ी की पसंद और जरूरतों के अनुरूप हो।

नए रंगों और डिजाइनों से बदल रही खादी की पहचान

आमतौर पर खादी को पारंपरिक पहनावे और उम्रदराज लोगों की पसंद से जोड़कर देखा जाता है। शोएब इसी धारणा को बदलना चाहते हैं। उनका मानना है कि सही डिजाइन, रंगों के चुनाव और बेहतर स्टाइलिंग के जरिए खादी को युवाओं के बीच भी लोकप्रिय बनाया जा सकता है।

इसी सोच के तहत हैंडलूम फैब्रिक से आधुनिक डिजाइन वाले कपड़े तैयार किए जा रहे हैं। इनमें पारंपरिक कपड़े की खासियत के साथ आज के फैशन ट्रेंड को भी ध्यान में रखा जाता है। इससे खादी को एक नए और आकर्षक अंदाज में पेश करने का अवसर मिल रहा है।

शोएब की कोशिश है कि खादी से तैयार परिधान देखने में स्टाइलिश होने के साथ पहनने में भी आरामदायक हों। वह ऐसे डिजाइन विकसित करना चाहते हैं, जो युवाओं को पारंपरिक भारतीय कपड़ों की ओर आकर्षित कर सकें।

फिलहाल पुरुषों के कपड़ों पर फोकस, फरवरी में आएगी महिलाओं की रेंज

एस.एच एसेंशियल्स फिलहाल पुरुषों के परिधानों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। ब्रांड की योजना आने वाले फरवरी महीने में महिलाओं के लिए भी खादी के कपड़ों की नई रेंज पेश करने की है।

इस प्रस्तावित कलेक्शन में खादी से बने ब्लेजर, पैंट और कुर्तियां शामिल करने की तैयारी है। इन परिधानों को डिजाइन करते समय आधुनिक स्टाइल के साथ आराम और त्वचा के अनुकूल कपड़े के इस्तेमाल पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

महिलाओं के लिए नई रेंज पेश होने से ब्रांड के उत्पादों का दायरा बढ़ाने में मदद मिल सकती है। साथ ही, पारंपरिक हैंडलूम फैब्रिक को अलग-अलग तरह के परिधानों में इस्तेमाल करने के नए अवसर भी सामने आएंगे।

लैक्मे फैशन वीक तक पहुंचने की तैयारी

शोएब हुसैन अपने डिजाइनर परिधानों को लैक्मे फैशन वीक में पेश करने की दिशा में भी प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए वह अपने डिजाइन और कलेक्शन को पेश करने की तैयारी में जुटे हैं।

अगर उनके डिजाइन को इस तरह के बड़े फैशन मंच पर जगह मिलती है, तो खादी को आधुनिक फैशन के रूप में व्यापक पहचान दिलाने का अवसर मिल सकता है। इससे भारतीय पारंपरिक कपड़ों को नए दर्शकों तक पहुंचाने में भी मदद मिल सकती है।

हालांकि, फैशन वीक में उनके डिजाइन पेश किए जाने को लेकर अभी इसे तैयारी और प्रयास के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को भी मिल रहा काम

इस स्टार्टअप की एक खास बात यह भी है कि इसके उत्पाद तैयार करने में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं शामिल हैं। उनके हाथों से तैयार होने वाले कपड़ों के जरिए पारंपरिक कारीगरी और स्थानीय कौशल को आगे बढ़ाने का अवसर मिल रहा है।

खादी और हैंडलूम आधारित व्यवसाय ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करने में भी भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे प्रयासों से महिलाओं को काम से जोड़ने के साथ उनके हुनर को बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलती है।

शोएब का मानना है कि भारतीय पारंपरिक कपड़ों और शिल्प को आधुनिक डिजाइन के साथ प्रस्तुत करके नई पीढ़ी से जोड़ा जा सकता है। उनका उद्देश्य खादी को केवल विरासत के रूप में संरक्षित रखना नहीं, बल्कि उसे बदलते फैशन के साथ आगे बढ़ाना भी है।

मेरठ के शोएब हुसैन की यह पहल दिखाती है कि पारंपरिक भारतीय कपड़ों को नए डिजाइन और आधुनिक सोच के साथ पेश करके फैशन की दुनिया में उनके लिए नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं।

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