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पंचायत चुनाव पर सस्पेंस बरकरार, समयसीमा को लेकर हाईकोर्ट में आज होगी सुनवाई

 

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव समय पर कराए जाने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में सोमवार को सुनवाई हो सकती है। इस मामले में अब तक चार बार सुनवाई टल चुकी है। मामले की सुनवाई जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की डिवीजन बेंच करेगी।

यूपी राज्य निर्वाचन आयोग अपनी ओर से जवाब दाखिल कर चुका है। माना जा रहा है कि हाईकोर्ट इस मामले में कोई अहम निर्देश या आदेश जारी कर सकता है।

इस मामले की शुरुआत याचिकाकर्ता इम्तियाज हुसैन की ओर से दायर याचिका से हुई थी, जिसमें मांग की गई कि पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने से पहले पूरी चुनाव प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी कराई जाए। याचिका में कहा गया कि पंचायत चुनाव 26 मई 2026 या उससे पहले कराए जाने चाहिए।

17 मार्च को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग से पूछा था कि संवैधानिक समयसीमा के भीतर पंचायत चुनाव क्यों नहीं कराए जा सकते। कोर्ट ने आयोग से यह भी स्पष्ट करने को कहा था कि क्या वह संविधान के अनुच्छेद 243E के तहत तय समय सीमा में चुनाव कराने की स्थिति में है।

इसके बाद 25 मार्च और फिर 8 अप्रैल को सुनवाई तय हुई, लेकिन विभिन्न कारणों से मामला नहीं सुना जा सका। 8 अप्रैल को लंच के बाद सुनवाई प्रस्तावित थी, लेकिन अधिक मामलों के कारण यह फिर टल गई।

हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव का विस्तृत कार्यक्रम जारी करने की मांग वाली दूसरी याचिकाओं को भी इम्तियाज हुसैन की याचिका के साथ जोड़ने का निर्देश दिया है।

याचिका में कहा गया है कि पंचायतों का कार्यकाल पांच वर्ष से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता। यूपी में वर्ष 2021 में पंचायत चुनाव हुए थे, जिसके आधार पर ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्यों का कार्यकाल मई 2026 में समाप्त होना है।

राज्य निर्वाचन आयोग ने अदालत में दलील दी थी कि पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी करना राज्य सरकार का दायित्व है, जो आयोग से परामर्श के बाद जारी की जाती है।

पंचायत चुनाव में देरी की कई वजहें भी सामने आ रही हैं। मतदाता सूची पुनरीक्षण, जनगणना के लिए हाउस लिस्टिंग का कार्य, आरक्षण निर्धारण प्रक्रिया और प्रशासनिक तैयारियों में देरी को प्रमुख कारण माना जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक राजनीतिक स्तर पर भी पंचायत चुनाव समय पर कराने को लेकर ज्यादा उत्साह नहीं है। माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव 2027 से पहले पंचायत चुनाव होने पर राजनीतिक समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।

पंचायतीराज विभाग की ओर से अभी तक आरक्षण निर्धारण के लिए जरूरी समिति का गठन भी नहीं किया गया है। ऐसे में पंचायत चुनाव समय पर होंगे या टलेंगे, इस पर सभी की नजरें अब हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं।

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