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75 हजार में तय हुई थी पुष्पवर्षा, मौके पर नहीं आया हेलीकॉप्टर; कंपनी को 10 लाख की सजा

 

बुलंदशहर। गणेश चतुर्थी महोत्सव के दौरान तय कार्यक्रम के मुताबिक हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा नहीं कराने के मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने सेवा प्रदाता कंपनी के खिलाफ कड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने कंपनी पर कुल 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है और निर्धारित समय के भीतर राशि जमा करने का आदेश दिया है।

यह मामला बुलंदशहर के देवीपुरा निवासी विवेक कुमार की शिकायत से जुड़ा है। शिकायतकर्ता के मुताबिक वर्ष 2022 में गणेश चतुर्थी के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें हेलीकॉप्टर के जरिए करीब एक घंटे तक पुष्प वर्षा कराने की योजना बनाई गई थी।

75 हजार रुपये में तय हुई थी सेवा

विवेक कुमार ने इस आयोजन के लिए अलीगढ़ की पायनियर फ्लाइंग एकेडमी से संपर्क किया था। दोनों पक्षों के बीच 9 सितंबर 2022 को एक घंटे की हेलीकॉप्टर पुष्प वर्षा के लिए 75 हजार रुपये में सहमति बनी थी।

कार्यक्रम को लेकर पहले से प्रचार किया गया था। इसी वजह से आयोजन वाले दिन बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए। लेकिन तय समय पर सेवा उपलब्ध कराने के बजाय कंपनी की ओर से हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराने में असमर्थता जताई गई।

कार्यक्रम रद्द होने से आयोजक को हुआ नुकसान

शिकायतकर्ता का कहना है कि आयोजन की तैयारियों और प्रचार समेत करीब 8 लाख रुपये खर्च किए गए थे। हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा नहीं होने के कारण कार्यक्रम की योजना प्रभावित हुई और उन्हें लोगों की नाराजगी का सामना करना पड़ा।

विवेक कुमार ने आयोग को बताया कि इस घटना का उन पर काफी मानसिक प्रभाव पड़ा और इसी दौरान उन्हें हृदय संबंधी परेशानी भी हुई। इसके बाद उन्होंने सेवा में कमी का आरोप लगाते हुए उपभोक्ता आयोग का रुख किया।

आयोग ने कंपनी को 10 लाख रुपये देने का आदेश दिया

मामले की सुनवाई के बाद जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष हसनैन कुरैशी ने सेवा प्रदाता कंपनी के खिलाफ आदेश पारित किया। आयोग ने कुल 10 लाख रुपये की राशि निर्धारित की है।

इसमें से 5 लाख रुपये शिकायतकर्ता को क्षतिपूर्ति के तौर पर दिए जाएंगे, जबकि 5 लाख रुपये उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा कराने होंगे। इसके अतिरिक्त आयोग ने शिकायतकर्ता को 10 हजार रुपये वाद व्यय के रूप में देने का भी निर्देश दिया है।

45 दिन में भुगतान नहीं हुआ तो लगेगा ब्याज

आयोग ने कंपनी को आदेश का पालन करते हुए निर्धारित राशि 45 दिनों के भीतर जमा करने को कहा है। तय अवधि में भुगतान नहीं करने पर बकाया रकम पर 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज लागू होगा। इसके साथ ही आदेश के पालन के लिए अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

इस फैसले के बाद उपभोक्ता सेवाओं में किए गए वादे को पूरा नहीं करने वाली कंपनियों के खिलाफ आयोग के रुख को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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