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FCRA संशोधन बिल पर मिजोरम CM की केंद्र से मांग, बोले- JPC को भेजकर हो व्यापक चर्चा

 

मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने प्रस्तावित विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम यानी FCRA में बदलाव से जुड़े विधेयक को लेकर केंद्र सरकार से अहम अपील की है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि इस बिल को संसद में अंतिम रूप देने से पहले संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजा जाना चाहिए, ताकि इसके प्रावधानों पर व्यापक स्तर पर चर्चा और संबंधित पक्षों की राय ली जा सके।

मुख्यमंत्री का कहना है कि विधेयक को JPC के पास भेजने से देश के अलग-अलग हिस्सों और इससे प्रभावित होने वाले संगठनों व अन्य हितधारकों की चिंताओं को समझने और उनके सुझावों पर विचार करने का अवसर मिलेगा।

FCRA में प्रस्तावित बदलाव को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?

प्रस्तावित संशोधन में एक विशेष प्राधिकरण गठित करने का प्रावधान बताया गया है। इस प्राधिकरण को ऐसे गैर-लाभकारी संगठनों की संपत्तियों को जब्त करने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने की शक्ति मिल सकती है, जिनका FCRA लाइसेंस रद्द किया जा चुका है।

मिजोरम में इस प्रस्ताव को लेकर खास तौर पर चर्चा हो रही है। ईसाई बहुल राज्य में चर्चों और नागरिक समाज से जुड़े संगठनों ने बिल के कुछ प्रावधानों को लेकर चिंता जाहिर की है। उनका मानना है कि प्रस्तावित बदलाव विदेशी अंशदान प्राप्त करने वाले संगठनों की गतिविधियों और कामकाज पर असर डाल सकते हैं।

अमित शाह से मुलाकात कर रखी गई चिंताएं

मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने बताया कि उन्होंने हाल ही में नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। इस बैठक में मिजोरम के विभिन्न ईसाई संप्रदायों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल में मिजोरम कोहरन हुइतुते समिति (MKHC) और काउंसिल ऑफ चर्चेस इन मिजोरम (CCM) से जुड़े प्रतिनिधि भी मौजूद थे। बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने प्रस्तावित कानून के कुछ हिस्सों को लेकर अपनी चिंताएं और सुझाव केंद्रीय गृह मंत्री के सामने रखे।

इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्रालय को एक ज्ञापन भी सौंपा गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने सरकार से इन प्रावधानों पर व्यापक चर्चा और सभी संबंधित पक्षों की राय पर विचार करने की मांग की है।

‘JPC को भेजा जाए विधेयक’

लालदुहोमा ने कहा कि विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने से कानून को अंतिम मंजूरी मिलने से पहले देश के अलग-अलग क्षेत्रों और विभिन्न हितधारकों की ओर से उठाई गई चिंताओं की विस्तृत समीक्षा की जा सकेगी।

मुख्यमंत्री ने केंद्र से लोकतांत्रिक परामर्श की भावना के तहत इस मांग पर विचार करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि कानून बनाने की प्रक्रिया ज्यादा समावेशी और पारदर्शी होनी चाहिए तथा प्रभावित पक्षों के सुझावों को उचित महत्व मिलना चाहिए।

उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार व्यापक जनहित और बेहतर नीति निर्माण को ध्यान में रखते हुए विधेयक को JPC के पास भेजने के अनुरोध पर सकारात्मक रूप से विचार करेगी।

12 अगस्त को संसद में चर्चा की तैयारी

प्रस्तावित FCRA संशोधन विधेयक को लेकर 12 अगस्त को संसद में चर्चा और इसे आगे बढ़ाने की प्रक्रिया पर विचार किया जाना है। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रस्तावित बदलाव पिछली तारीख से लागू नहीं किए जाएंगे।

वहीं, राज्य में इस विधेयक को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो रही हैं। इससे पहले कांग्रेस ने मिजोरम सरकार से विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की थी। प्रस्तावित संशोधन के विरोध में 11 अगस्त को आइजोल में मार्च निकाले जाने की भी तैयारी है।

ऐसे में FCRA संशोधन बिल को लेकर आने वाले दिनों में मिजोरम में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस और तेज होने की संभावना है।

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