लखनऊ का छोटा इमामबाड़ा के दोनों गेट जर्जर हो चुके हैं। दीवारों की मजबूती खत्म हो रही है। मसाला और चूना तेजी से झड़ रहा है। वर्षों से मरम्मत न होने की वजह से नवाबों के शहर का यह शान किसी भी वक्त ढह सकता है।
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इमारत को बचाने की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने इसके रेनोवेशन के निर्देश दिए हैं। साथ ही इमामबाड़ा के गेट के पास हुए अवैध कब्जे को भी जल्द हटाने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट के फैसले से उम्मीद जगी है कि यह इमारत फिर से लखनऊ की शान बनेगी।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने अपनी रिपोर्ट में इमारत के कभी भी गिरने का खतरा जताया है। इसके बाद हाईकोर्ट ने हुसैनाबाद ट्रस्ट और जिला प्रशासन लखनऊ को रेनोवेशन के निर्देश जारी किए हैं।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद दैनिक भास्कर टीम ने इमारत को करीब से देखा। दरवाजों की स्थिति बेहद जर्जर है। गेट के आसपास अतिक्रमण और अवैध कब्जा है। छत का प्लास्टर टूट चुका है। दीवारों से मसाले झड़ रहे हैं। जगह-जगह घास उग आई है।
तस्वीरों में देखें लखनऊ के छोटा इमामबाड़ा के ताजा हालात…
लखनऊ का छोटा इमामबाड़ा देखने के लिए देश-विदेश के टूरिस्ट पहुंचते हैं।

इमामबाड़ा के गेट पर ऐसे होल्स बन गए हैं। ASI ने इससे इमारत को खतरा बताया है।

तस्वीर में देख सकते हैं कि इमारत की दीवारों में घास-फूस उग गई है। वर्षों से मरम्मत नहीं हुई।

लखनऊ की ऐतिहासिक इमारत पर अवैधा कब्जा करके बर्फ बेचा जा रहा है।

इसी इमारत में पुलिस चौकी सतखंडा का भी संचालन किया जा रहा है।

यह हैं प्रसिद्ध इमारत में अतिक्रमण का हाल। एक लाइन से दुकानें चलाई जा रही हैं।
हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने क्या आदेश दिया हाईकोर्ट ने हुसैनाबाद ट्रस्ट और जिला प्रशासन को निर्देश दिया है, कि दोनों गेट पर रहने वाले अनधिकृत व्यक्तियों को हटाया जाए। अवैध कब्जे हटाए जाएं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) इन गेटों का निरीक्षण करे। मरम्मत और संरक्षण का लिए एस्टीमेट तैयार करे।
कोर्ट ने आगे कहा कि इसकी मरम्मत और संरक्षण का बजट कहां से आएगा? 20 जनवरी को होने वाली सुनवाई में यह भी तय हो जाएगा। हाईकोर्ट के इस आदेश का क्षेत्रीय लोगों ने स्वागत किया है। इससे छोटा इमामबाड़ा और दूसरी इमारतें बची रहेंगी।

आधिवक्ता मोहम्मद हैदर ने याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने जीर्णोद्धार का दिया आदेश है।
हाईकोर्ट का फैसला स्वागत योग्य याचिकाकर्ता मोहम्मद हैदर ने कहा कि 2013 में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने जो फैसला दिया है, यह स्वागत योग्य है। उम्मीद करते हैं कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण निरीक्षण के बाद दोनों गेट के मरम्मत का एस्टीमेट तय समय के अंदर कोर्ट को सौंपेगा। जिला प्रशासन क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त करेगा।

डॉ. नसीब ने कहा- इमामबाड़े स्थिति देखकर अफसोस होता है। ऐतिहासिक इमारत का बुरा हाल है।
बदहाल स्थिति पर जताया अफसोस छोटा इमामबाड़ा घूमने आए डॉक्टर नसीब ने कहा कि इमामबाड़ा की तस्वीर देखकर बेहद अफसोस होता है। छोटा इमामबाड़ा धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत है। इसके चारों ओर सिर्फ ट्रैफिक जाम और खाने की दुकान नजर आ रही है।
हाईकोर्ट के इस फैसले से पूरा लखनऊ खुश है। यह एक पवित्र स्थल है, जिसे दुकानदारों ने सिर्फ बाजार तक सीमित कर दिया है। देश-विदेश से लोग इन इमारतों को देखने आते हैं। हाईकोर्ट के साथी अधिवक्ता बधाई के पात्र हैं, जिन्होंने इस ऐतिहासिक इमारत को संरक्षित करने की लड़ाई लड़ी।

छेत्रीय दुकानदार मोहम्मद हामिद ने कहा अतिक्रमण और अवैध दुकानों से छोटे इमाम बाड़े को हो रहा है नुकसान
100 से अधिक अवैध दुकानें लगती है क्षेत्रीय दुकानदार मोहम्मद हामिद ने कहा कि हाईकोर्ट का यह फैसला सराहनीय है। हुसैनाबाद ट्रस्ट के द्वारा जो दुकान अलॉट की गई है वह तो नियम अनुसार चल रही है। इसके अलावा लगभग 100 दुकान हैं, जो इस पूरे क्षेत्र में नियमों को ताक पर रखकर लगाई जा रही।
यह दुकान अतिक्रमण का और यातायात बाधित करने का मुख्य कारण बन रही हैं। दुकानों के कारण बाहर से आने वाले पर्यटकों को बेहद समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अधिक संख्या में दुकान होने के कारण तेल से निकलने वाले स्मोक से इमारतें काली हो रही हैं।

क्षेत्रीय निवासी शमशी आजाद बोले- सरकार के साथ सबको इमारत की सुरक्षा करनी होगी।
ऐसी इमारतें दोबारा बनना संभव नहीं क्षेत्रीय निवासी शमसी आजाद ने कहा कि यह बहुत आवश्यक हो गया है, कि पुराने लखनऊ के तमाम इमारत को संरक्षित किया जाए। अगर इन इमारत को लेकर लापरवाही बरती गई तो आने वाली पीढ़ी इनका इतिहास किताबों में पढ़ेगी। इन भव्य इमारतों को देख नहीं पाएगी।
भविष्य में ऐसी इमारत दोबारा बनना संभव नहीं है। इन इमारतों की विश्व स्तर पर पहचान और मान्यता है। इसको अतिक्रमण और अव्यवस्थाओं के भेंट नहीं चढ़ने देना है। सरकार और विभाग के साथ आम आदमी की जिम्मेदारी बनती है, कि इमारत की सुरक्षा में अपनी भूमिका निभाएं।
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Zaman Times