कुशीनगर में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया है। उत्तर प्रदेश, बिहार और नेपाल से एक लाख से अधिक श्रद्धालु बासी नदी में आस्था की डुबकी लगाने के लिए पहुंच रहे हैं। मान्यता है कि बासी नदी में स्नान करने से ‘सौ काशी, एक बासी’ के बराबर पुण्य मिलता है, जिससे इस स्थान का धार्मिक महत्व बढ़ जाता है।
बासी नदी के किनारे महिला श्रद्धालुओं ने दीपदान किया। इस अवसर पर कुशीनगर जिले के सांसद विजय दुबे और सदर विधायक मनीष जैसवाल सहित कई नेताओं ने गंगा आरती कार्यक्रम में भाग लिया।
दोपहर बाद से ही दूर-दराज के श्रद्धालु मेला स्थल पर पहुंचने लगे थे। रात करीब 11 बजे तक श्रद्धालुओं की संख्या 50 हजार से अधिक हो गई थी। ठहरने की उचित व्यवस्था न होने के कारण कई श्रद्धालुओं ने पेड़ों के नीचे और खुले में जगह ली।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान श्रीरामचंद्र की बारात अयोध्या से जनकपुर (नेपाल) जाते समय बिहार सीमा पर बासी तट पर रुकी थी। सुबह बारात ने इसी नदी में स्नान के बाद अपनी यात्रा आगे बढ़ाई थी। विवाह के बाद जनकपुर से अयोध्या लौटते समय भी भगवान श्रीराम ने त्रिलोकपुर गांव में बांसी नदी के रामघाट पर रात्रि विश्राम किया था।
मेले की तैयारियों और व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए कुशीनगर के जिलाधिकारी (डीएम) महेंद्र सिंह तंवर और पुलिस अधीक्षक (एसपी) केशव कुमार ने क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने सुरक्षा और सुविधाओं का निरीक्षण किया।
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