दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पैलेट गन के इस्तेमाल का मामला चर्चा में है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, घटना के दौरान रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के एक जवान द्वारा पैलेट गन का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि इस दौरान सात राउंड फायर किए गए, जिससे तीन प्रदर्शनकारी गंभीर रूप से घायल हुए। घायलों का इलाज दिल्ली-एनसीआर के अलग-अलग अस्पतालों में जारी है।
इस घटना के बाद पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। विपक्ष ने मामले को लेकर सरकार से जवाब मांगने की बात कही है, जबकि संबंधित अधिकारियों की ओर से पूरे घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन परिस्थितियों में इस हथियार का इस्तेमाल किया गया।
पैलेट गन कब और कैसे इस्तेमाल की जाती है?
भीड़ नियंत्रण के लिए तैनात RAF के जवानों को एक निर्धारित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का पालन करना होता है। आमतौर पर किसी भी प्रदर्शन के दौरान सबसे पहले लोगों को हटाने के लिए लाठीचार्ज या बैटन का इस्तेमाल किया जाता है। यदि स्थिति और तनावपूर्ण हो जाए तो आंसू गैस छोड़ी जाती है। इसके बाद भी हालात काबू में न आने पर सीमित परिस्थितियों में पैलेट गन का उपयोग किया जा सकता है।
हर जवान के पास पैलेट गन नहीं होती। केवल कुछ प्रशिक्षित कर्मियों को ही यह हथियार उपलब्ध कराया जाता है और इसका इस्तेमाल विशेष परिस्थितियों में ही किया जाता है।
RAF की भूमिका
रैपिड एक्शन फोर्स, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की विशेष इकाई है, जिसे दंगा नियंत्रण, भीड़ प्रबंधन और कानून-व्यवस्था बनाए रखने जैसे संवेदनशील कार्यों के लिए तैयार किया गया है। इसकी पहचान नीले रंग की वर्दी से होती है, जिससे यह अन्य सुरक्षा बलों से अलग नजर आती है।
पैलेट गन पर पहले भी हो चुका है विवाद
पैलेट गन का उपयोग पहले भी विवादों में रहा है। लगभग एक दशक पहले जम्मू-कश्मीर में हिंसक प्रदर्शनों के दौरान इसका इस्तेमाल किया गया था। उस समय कई लोगों के घायल होने और आंखों में गंभीर चोट लगने की घटनाओं के बाद मानवाधिकार संगठनों ने इस पर चिंता जताई थी। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने इसके इस्तेमाल को काफी सीमित कर दिया था।
अब जंतर-मंतर की घटना के बाद पैलेट गन एक बार फिर चर्चा में है। माना जा रहा है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां भीड़ नियंत्रण से जुड़े मौजूदा दिशा-निर्देशों और SOP की समीक्षा कर सकती हैं। फिलहाल पूरे मामले की आधिकारिक जांच जारी है और विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
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