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मिडिल ईस्ट संकट का भारत पर असर: Jawaharlal Nehru Port Trust में अटके 1000+ कंटेनर, एक्सपोर्ट और किसानों पर बढ़ा दबाव

 

Iran और United States के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक व्यापार पर भी दिखने लगा है। मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष के कारण समुद्री व्यापार प्रभावित हो रहा है, जिसका सीधा असर भारत के निर्यात पर पड़ा है। Jawaharlal Nehru Port Trust (JNPT) पर खाड़ी देशों के लिए भेजे जाने वाले 1,000 से अधिक कंटेनर फिलहाल फंसे हुए हैं।

इन कंटेनरों में अंगूर, प्याज, पपीता, अनार और तरबूज जैसे कृषि उत्पाद शामिल हैं। जानकारी के अनुसार करीब 150 कंटेनर नासिक से भेजे गए प्याज के हैं। हर कंटेनर में लगभग 29 से 30 टन प्याज लदा है, यानी करीब 5,400 टन प्याज इस समय बंदरगाह पर अटका हुआ है।

दुबई रूट पर सबसे ज्यादा असर

इनमें से ज्यादातर खेप खाड़ी देशों के लिए भेजी गई थीं और उनका मुख्य ट्रांजिट रूट Dubai था। लेकिन मौजूदा हालात के चलते वहां का बाजार अस्थायी रूप से प्रभावित बताया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि लगभग 370 भारतीय कंटेनर पहले ही दुबई पहुंच चुके हैं, लेकिन वे भी वहीं अटके हुए हैं। यही समुद्री मार्ग यूरोप के कुछ देशों के लिए होने वाले निर्यात में भी इस्तेमाल होता है, जिससे सप्लाई चेन पर असर पड़ने लगा है।

हर दिन बढ़ रहा खर्च

सबसे ज्यादा चिंता उन निर्यातकों को है जिनका माल जल्दी खराब हो सकता है। फल और सब्जियों जैसे कृषि उत्पाद लंबे समय तक बंदरगाह पर नहीं रखे जा सकते।

रेफ्रिजरेटेड कंटेनरों को पोर्ट पर खड़ा रखने में हर दिन लगभग 8,000 रुपये का खर्च आ रहा है। अगर स्थिति लंबी चली तो माल उतारने पर प्रति कंटेनर 5,000 से 6,000 रुपये तक अतिरिक्त खर्च भी करना पड़ सकता है।

घरेलू बाजार पर भी असर

निर्यात रुकने का असर अब घरेलू बाजार में भी दिखने लगा है। यदि माल विदेश नहीं जा पाया तो देश के बाजार में आपूर्ति बढ़ सकती है, जिससे प्याज और अन्य कृषि उत्पादों की कीमतों में गिरावट आ सकती है। किसान इसे दोहरी मार मान रहे हैं, क्योंकि पहले से ही उन्हें लागत और बाजार कीमतों का दबाव झेलना पड़ रहा है।

सरकार से राहत की मांग

हॉर्टिकल्चर प्रोड्यूस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन Horticulture Produce Exporters Association (APDA) ने सरकार से मांग की है कि बंदरगाह पर खड़े कंटेनरों का अतिरिक्त खर्च सरकार वहन करे।

इसके अलावा निर्यातकों ने केंद्र सरकार से वैकल्पिक व्यापार मार्ग तलाशने और प्रभावित किसानों व निर्यातकों के लिए विशेष राहत पैकेज की घोषणा करने की भी मांग की है।

मौजूदा हालात में व्यापार जगत और किसान दोनों की नजर इस बात पर टिकी है कि मध्य-पूर्व में तनाव कब कम होगा और समुद्री व्यापार सामान्य स्थिति में कब लौटेगा।

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