कोलकाता: पश्चिम बंगाल की आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के प्रमुख और विधायक हुमायूं कबीर ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने संकेत दिया है कि अगर उनके क्षेत्र के अधिकांश लोग उनके फैसले के खिलाफ होते हैं, तो वह विधायक पद छोड़ सकते हैं। कबीर ने यहां तक कहा कि वह विधानसभा में अपनी सीट पर बैठने के बजाय राजनीति से दूरी बनाने का फैसला भी ले सकते हैं।
हुमायूं कबीर का यह बयान रेजीनगर में मतदान के दौरान पुलिस के साथ हुए विवाद के बाद सामने आया है। मतदान के दिन पुलिस के साथ कथित तौर पर तीखी बहस के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया था। रिहाई के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए वह भावुक नजर आए और उन्होंने चुनावी राजनीति से अलग होने के संकेत दिए।
कबीर ने यह भी दावा किया कि मुर्शिदाबाद जिले की मुस्लिम बहुल विधानसभा सीट पर बीजेपी जीत दर्ज कर सकती है। हालांकि, उनके इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
‘विधायक पद का सम्मान कहां रह गया?’
हुमायूं कबीर ने अपने साथ हुई कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि एक विधायक के पद की भी कुछ गरिमा होती है। उनके मुताबिक, उन्होंने चुनाव आयोग के किसी नियम का उल्लंघन नहीं किया था और न ही वह किसी मतदान केंद्र के अंदर गए थे।
उन्होंने दावा किया कि वह पार्टी कार्यालय में मौजूद थे, जहां से पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और करीब 12 घंटे तक अपने पास रखा।
कबीर ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब एक निर्वाचित विधायक के साथ इस तरह का व्यवहार किया जा सकता है, तो फिर विधायक बने रहने का क्या मतलब है। उन्होंने कहा कि उनके लिए पद से ज्यादा महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनता का सम्मान है।
पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप
हुमायूं कबीर ने मतदान प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि मतदान प्रतिशत 93 फीसदी से अधिक रहा और इसमें बड़ी संख्या में वोट पुलिस की मौजूदगी में डलवाए गए।
कबीर ने आरोप लगाया कि पुलिस ने बीजेपी के पक्ष में मतदान कराने में भूमिका निभाई। उन्होंने यह भी दावा किया कि मुख्यमंत्री की ओर से चुनाव में जीत का अंतर सीमित रखने की रणनीति बनाई गई थी और एक विशेष उम्मीदवार को दूसरे स्थान पर रखने की योजना थी।
हालांकि, इन आरोपों को लेकर संबंधित पक्षों की ओर से पुष्टि या प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
‘मैं मतगणना केंद्र नहीं जाऊंगा’
हुमायूं कबीर ने आगे कहा कि वह मतगणना के दिन भी केंद्र पर जाने का इरादा नहीं रखते। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी की ओर से भी कोई प्रतिनिधि वहां नहीं जाएगा।
उन्होंने कहा कि विधानसभा की सीट को लेकर भी वह बड़ा फैसला ले सकते हैं और विधानसभा की कार्यवाही में शामिल नहीं होने की बात कही। कबीर के मुताबिक, अगर जनता उनके फैसले से सहमत नहीं है तो वह विधायक पद से इस्तीफा देने पर विचार करेंगे।
उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी का पंजीकरण पहले से मौजूद है और संगठन का काम जारी रहेगा। हालांकि, व्यक्तिगत रूप से राजनीति में आगे क्या करना है, इस पर वह बाद में फैसला लेंगे।
जनता की राय को बताया निर्णायक
हुमायूं कबीर ने अपने राजनीतिक भविष्य का फैसला जनता की राय से जोड़ते हुए कहा कि यदि बड़ी संख्या में लोग उनके निर्णय का समर्थन करते हैं, तो वह विधायक पद छोड़ने से पीछे नहीं हटेंगे।
उनके इस बयान के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या हुमायूं कबीर वास्तव में विधायक पद से इस्तीफा देंगे या यह फैसला मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों के विरोध में दिया गया भावनात्मक बयान है। फिलहाल उनके अगले कदम पर सबकी नजर बनी हुई है।
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