ग्राम पंचायत सचिवों ने सरकारी कामकाज के बढ़ते दबाव को लेकर नाराज़गी जताई है। बड़ी संख्या में सचिव एकत्रित हुए और अपनी समस्याओं पर चर्चा की। ग्राम विकास अधिकारी एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष के नेतृत्व में सभी ने चेतावनी दी कि यदि स्थितियां नहीं बदलीं तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
जिला अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह ने बताया कि विकास कार्यों में बेहतर रैंकिंग लाने के लिए अधिकारियों द्वारा दिन-रात दबाव बनाया जा रहा है। यहां तक कि अवकाश के दिनों में भी काम के लिए बुलाया जाता है, जिससे उनका व्यक्तिगत और पारिवारिक जीवन गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है।
उन्होंने कहा कि रात में गांवों में चौपाल लगाने और मुख्यमंत्री के लक्ष्य 2047 को घर-घर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी सचिवों पर डाल दी गई है। इसी कारण कर्मचारियों में व्यापक रोष है।
सचिवों ने बताया कि पहले भी अपनी समस्याओं को लेकर ज्ञापन सौंपा जा चुका है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि वे दोबारा ज्ञापन सौंपेंगे और अगर इस बार भी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन करेंगे।
सुरेंद्र सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि छुट्टी के दिनों में भी अनावश्यक रूप से बुलाकर प्रताड़ित किया जाता है। इस वजह से वे न तो रिश्तेदारों के अंतिम संस्कार में शामिल हो पा रहे हैं और न ही स्वास्थ्य संबंधी जरूरी काम कर पा रहे हैं। उनका कहना है कि नवरात्र जैसे पर्व भी वे नहीं मना पा रहे हैं।
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