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NEET मुद्दे पर सरकार-विपक्ष आमने-सामने, खरगे बोले- पहले इस्तीफा फिर होगी चर्चा

 

NEET पेपर लीक मामले को लेकर संसद से लेकर सड़क तक राजनीतिक माहौल गर्म बना हुआ है। केंद्र सरकार ने कहा है कि वह इस मुद्दे पर चर्चा और छात्रों से संवाद के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष चर्चा से पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ है।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि विपक्ष तभी चर्चा में शामिल होगा, जब शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा देंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा परिस्थितियों में युवाओं को सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करना पड़ रहा है और उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है।

संसद के मानसून सत्र के दौरान इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने दिखाई दिए। दोनों पक्षों ने संसद परिसर में एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी की। इससे पहले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी सरकार पर छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे।

इस बीच केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है और छात्रों के साथ बातचीत कर समाधान निकालना चाहती है। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी स्थान पर संवाद के लिए तैयार है और इसका उद्देश्य केवल समस्या का समाधान करना है, न कि इसे प्रतिष्ठा का विषय बनाना।

उधर, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्र संगठन CJP ने भी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई। संगठन का कहना है कि जब तक मंत्री पद नहीं छोड़ते, आंदोलन जारी रहेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में पेपर लीक के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की घोषणा की है। सरकार का कहना है कि इस कदम से दोषियों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई होगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगेगा।

राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों की प्रमुख मांगें स्पष्ट हैं—शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, छात्रों से माफी और प्रदर्शन के दौरान हिंसा के आरोपों की निष्पक्ष जांच। वहीं CJP ने भी दोहराया कि उनकी पहली मांग धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देश के युवाओं का भविष्य सुरक्षित रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उनके अनुसार, फास्ट ट्रैक कोर्ट का फैसला युवाओं के हितों की रक्षा और परीक्षा प्रणाली में भरोसा कायम रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने विपक्ष से संसद में चर्चा में भाग लेने की अपील करते हुए कहा कि इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने के बजाय सभी दलों को मिलकर परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने तथा कड़े कानूनों पर विचार करना चाहिए।

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