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इटावा: फर्जी दस्तावेजों से नौकरी पाने वाले शिक्षक को सज़ा – अदालत ने 25 साल पुराने मामले में सुनाई 5 साल की जेल और 13 हजार रुपये का जुर्माना।

 

इटावा में 25 साल पुराने फर्जीवाड़े के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर-10 अखिलेश कुमार ने बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने आरोपी सम्बोध सिंह को पांच साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 13 हजार का जुर्माना भी लगाया है।

मामला सिविल लाइन थाना क्षेत्र के डूंडपुरा गांव का है, जहां के निवासी सम्बोध सिंह पुत्र अजगर सिंह ने वर्ष 2000 में शिक्षा विभाग में मृतक आश्रित कोटे के तहत फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी हासिल कर ली थी। आरोप है कि सम्बोध सिंह ने जसवंतनगर क्षेत्र में कार्यरत शिक्षिका विमला देवी को अपनी माता दर्शाया, जबकि वह उसकी मां थी ही नहीं। जांच में यह तथ्य झूठा और फर्जी पाया गया।

मामले की शिकायत तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी (एबीएसए) लाल प्रताप सिंह द्वारा की गई थी। उन्होंने बकेवर थाने में सम्बोध सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने जांच कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।

करीब ढाई दशक तक चली सुनवाई के दौरान पेश हुए साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी पाया। कोर्ट ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं में पांच साल की सजा के साथ 13 हजार के जुर्माने से दंडित किया। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

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