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LAC पर चीन की सैन्य तैनाती घटने पर कांग्रेस ने मांगा जवाब, कहा- बातचीत से ही सुलझेगा विवाद

 

भारत और चीन के बीच संबंधों में सुधार तथा वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीनी सेना की तैनाती में कमी की जानकारी सामने आने के बाद कांग्रेस ने सरकार से कई सवाल पूछे हैं। पार्टी का कहना है कि दोनों देशों के बीच सीमा और सुरक्षा से जुड़े मतभेद अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। ऐसे मामलों का समाधान लगातार बातचीत, संवाद और आपसी विश्वास मजबूत करने से ही संभव होगा।

कांग्रेस ने सरकार से यह भी मांग की है कि LAC की मौजूदा स्थिति को लेकर जनता के सामने स्पष्ट और विस्तृत जानकारी रखी जाए। पार्टी नेताओं का कहना है कि केवल सैनिकों की संख्या कम होने की बात बताना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सीमा पर वास्तविक स्थिति भी स्पष्ट की जानी चाहिए।

भारत-चीन संबंधों में कई चुनौतियां

कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा कि भारत और चीन के रिश्ते कई स्तरों पर जुड़े हुए हैं। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध हैं, लेकिन साथ ही सीमा विवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे भी मौजूद हैं।

उन्होंने कहा कि दोनों देश बड़े पड़ोसी हैं और उनकी आबादी, अर्थव्यवस्था तथा सैन्य क्षमता काफी महत्वपूर्ण है। ऐसे में दोनों देशों के बीच किसी भी विवाद को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। समस्याओं को कम करने के लिए लगातार बातचीत और आपसी संपर्क बनाए रखना जरूरी है।

चिदंबरम के मुताबिक, यदि सरकार यह कह रही है कि LAC के पास चीनी सैनिकों की संख्या में कमी आई है, तो उसे आंकड़ों के साथ इसकी पूरी जानकारी भी साझा करनी चाहिए।

सरकार से पारदर्शिता की मांग

कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि सीमा पर चीनी सैनिकों की तैनाती में वास्तविक रूप से कितनी कमी आई है। इसके अलावा सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि भारतीय क्षेत्र में किसी तरह की घुसपैठ हुई है या नहीं।

उन्होंने सीमा के आसपास चीन की ओर से बनाई गई सैन्य संरचनाओं और अन्य निर्माण गतिविधियों की स्थिति पर भी जानकारी देने की मांग की। उनका कहना है कि सरकार जब सीमा की स्थिति में सुधार का दावा करती है, तो उससे जुड़े तथ्य भी सार्वजनिक किए जाने चाहिए।

हालांकि उन्होंने भारत और चीन के बीच जारी बातचीत का स्वागत किया और कहा कि जटिल मुद्दों का समाधान बातचीत के जरिए निकालने का प्रयास जारी रहना चाहिए।

पवन खेड़ा ने गश्त को लेकर पूछा सवाल

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने पूर्वी लद्दाख में भारतीय सेना की गश्त व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मई 2020 से पहले भारतीय जवान लद्दाख के कई निर्धारित गश्ती क्षेत्रों तक नियमित रूप से पहुंचते थे।

उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या अब भारतीय सैनिक पहले की तरह उन सभी गश्ती क्षेत्रों तक पहुंच पा रहे हैं या नहीं। साथ ही यह भी स्पष्ट करने की मांग की गई कि सीमा पर पहले जैसी स्थिति पूरी तरह बहाल हुई है या अभी कुछ बदलाव मौजूद हैं।

पवन खेड़ा ने कहा कि इन सवालों का जवाब रक्षा मंत्रालय, रक्षा मंत्री या गृह मंत्रालय की ओर से स्पष्ट रूप से दिया जाना चाहिए।

रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में क्या कहा गया?

रक्षा मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 में भारत-चीन सीमा की स्थिति को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सेना की ओर से LAC और पारंपरिक प्रशिक्षण क्षेत्रों में 10 ब्रिगेड स्तर की सैन्य टुकड़ियां तैनात किए जाने के बाद उत्तरी सीमा के सामने चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की तैनाती में उल्लेखनीय कमी देखने को मिली है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि LAC के सभी क्षेत्रों में भारतीय सेना की तैनाती मजबूत और संतुलित है। सेना को किसी भी संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रखा गया है।

10 ब्रिगेड में शामिल हैं कई सैन्य इकाइयां

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, वर्ष 2025 में तैनात की गई 10 ब्रिगेड संयुक्त हथियार संरचना के तहत काम करती हैं। इनमें पैदल सेना के साथ बख्तरबंद इकाइयां, तोपखाना और वायु रक्षा से जुड़ी सैन्य इकाइयां शामिल हैं।

इन सैन्य संरचनाओं को इस तरह तैयार किया गया है कि वे जरूरत पड़ने पर स्वतंत्र रूप से अभियान चला सकें और अलग-अलग परिस्थितियों में प्रभावी सैन्य प्रतिक्रिया दे सकें।

बातचीत के जरिए स्थिरता बनाए रखने पर जोर

रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तरी सीमाओं की सुरक्षा मजबूत रखने के साथ भारत और चीन के बीच राजनीतिक, कूटनीतिक तथा सैन्य स्तर पर बातचीत भी जारी रही। इन प्रयासों का उद्देश्य सीमा क्षेत्रों में स्थिरता बनाए रखना है।

भारत और चीन के बीच सीमा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए बनाए गए विभिन्न तंत्रों को भी दोबारा सक्रिय किया गया है। सरकार का कहना है कि सीमा संबंधी विषयों पर बातचीत और समाधान की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।

कुल मिलाकर, रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट जहां सीमा पर चीनी सैन्य तैनाती में कमी और भारत की मजबूत सैन्य तैयारी की बात करती है, वहीं कांग्रेस ने सरकार से वास्तविक जमीनी स्थिति, गश्त व्यवस्था और सीमा पर हुए बदलावों को लेकर अधिक पारदर्शिता की मांग की है।

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