अभिनेता प्रकाश राज ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस कार्रवाई को लेकर सरकार और दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर नाराजगी जताई। प्रकाश राज का कहना है कि दोनों नेताओं ने तिरंगा लहराया था और जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करना चाहते थे, इसके बावजूद उन्हें हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया।
प्रकाश राज ने कहा कि तिरंगा लहराने से दिल्ली की शांति भंग होने का सवाल नहीं उठता। उन्होंने घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों नेताओं को रातभर इधर-उधर ले जाया गया, फिर सुबह करीब तीन बजे मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया और उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अभिनेता ने इस पूरी कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे बड़ा मजाक बताया।
जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराने पहुंचे थे CJP नेता
मिली जानकारी के अनुसार, CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका दिल्ली के जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराने और विरोध प्रदर्शन करने पहुंचे थे। इस दौरान पुलिस ने दोनों को हिरासत में ले लिया। बाद में उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहां से पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया।
इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। प्रकाश राज ने भी दोनों नेताओं के खिलाफ हुई कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए सवाल किया कि क्या देश में राष्ट्रीय ध्वज फहराना अपराध बन गया है।
प्रकाश राज ने सरकार और पुलिस पर लगाए आरोप
प्रकाश राज ने अपने बयान में सरकार और पुलिस प्रशासन के रवैये पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जहां कुछ लोग सड़कों पर हंगामा करते हैं और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं, वहां उनके खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती। इसके उलट, शांतिपूर्ण विरोध करने वाले लोगों को हिरासत में लिया जा रहा है।
अभिनेता ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई से लोगों की आवाज को लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि विरोध प्रदर्शनों से निपटने का यही तरीका जारी रहा, तो आने वाले समय में देशभर में लोग अपनी बात रखने के लिए सड़कों पर उतर सकते हैं। उनके बयान में विरोध प्रदर्शन के अधिकार और पुलिस की कार्रवाई को लेकर असहमति साफ दिखाई दी।
अभिजीत दीपके ने भी कार्रवाई पर उठाए सवाल
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी सौरव दास और आशुतोष रांका को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने पर केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने सवाल उठाया कि राष्ट्रीय ध्वज फहराने के कारण किसी व्यक्ति को हिरासत में लेना कहां तक उचित है।
दीपके ने आरोप लगाया कि दोनों नेताओं को जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराने के बाद हिरासत में लिया गया। उन्होंने इस घटना की तुलना ब्रिटिश शासन के दौर से करते हुए कहा कि उस समय सार्वजनिक स्थानों पर तिरंगा फहराने वाले स्वतंत्रता सेनानियों को गिरफ्तार किया जाता था।
हालांकि, मामले में पुलिस की कार्रवाई के आधार और संबंधित कानूनी प्रावधानों की स्थिति को समझने के लिए आधिकारिक पक्ष तथा अदालत के आदेशों को देखना जरूरी है।
तिरंगा और विरोध प्रदर्शन को लेकर बढ़ी बहस
सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत के बाद राष्ट्रीय ध्वज फहराने और सार्वजनिक स्थानों पर विरोध प्रदर्शन करने के अधिकार को लेकर बहस तेज हो गई है। प्रकाश राज और अभिजीत दीपके ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, जबकि मामले के कानूनी पहलुओं का निर्धारण संबंधित तथ्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
फिलहाल, दोनों नेताओं की हिरासत का मामला चर्चा में है और आगे की कानूनी कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।
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