रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने BRICS देशों के बीच आर्थिक और कारोबारी सहयोग को और मजबूत करने की जरूरत बताई है। उन्होंने सदस्य देशों के बीच व्यापार, परिवहन, लॉजिस्टिक्स और तकनीकी परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए एक नए निवेश प्लेटफॉर्म के गठन का प्रस्ताव रखा है।
BRICS शिखर सम्मेलन से पहले सदस्य देशों के उद्योग जगत से जुड़े प्रमुख लोगों की बैठक को संबोधित करते हुए पुतिन ने कहा कि प्रस्तावित प्लेटफॉर्म के लिए न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) को आधार बनाया जा सकता है। इसका मकसद निजी क्षेत्र से निवेश जुटाकर सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं में नई परियोजनाओं को गति देना और उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाना है।
BRICS की आर्थिक ताकत का किया जिक्र
पुतिन ने BRICS की बढ़ती आर्थिक भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले पांच वर्षों में वैश्विक GDP में समूह के देशों की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से अधिक रही है। इसके मुकाबले G7 देशों की हिस्सेदारी करीब 29 प्रतिशत बताई गई।
रूसी राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि इसी अवधि के दौरान दुनिया की आर्थिक वृद्धि में BRICS देशों का योगदान आधे से अधिक रहा है। उनके मुताबिक, इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में पारंपरिक ताकतों के साथ-साथ नए आर्थिक केंद्रों का प्रभाव भी लगातार बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि BRICS का उद्देश्य किसी दूसरे देश या समूह के खिलाफ खड़ा होना नहीं है, बल्कि अपने सदस्य देशों के आर्थिक और राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाना है।
बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर जोर
पुतिन ने BRICS देशों के बीच बड़े बुनियादी ढांचा और परिवहन प्रोजेक्ट को लेकर भी सहयोग बढ़ाने की बात कही। उन्होंने कहा कि रूस आर्कटिक ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर और नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं में दूसरे साझेदार देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार है।
उन्होंने वित्तपोषण को इन परियोजनाओं के लिए अहम जरूरत बताया और उम्मीद जताई कि BRICS के दूसरे सदस्य देश भी निवेश प्लेटफॉर्म की इस पहल का समर्थन करेंगे।
पुतिन ने AI, डिजिटल टेक्नोलॉजी, मानव रहित परिवहन, वित्त, पर्यटन और उद्योग जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। उनका कहना था कि इन क्षेत्रों में संयुक्त प्रयास BRICS देशों के लिए नई आर्थिक संभावनाएं पैदा कर सकते हैं।
महिंद्रा समेत कई कंपनियों का उदाहरण
रूसी राष्ट्रपति ने BRICS देशों के बीच कारोबारी सहयोग को समझाने के लिए कई बड़ी कंपनियों का उदाहरण भी दिया। इनमें भारत की महिंद्रा के साथ चीन की हुआवेई, ब्राजील की एम्ब्रेयर, UAE की टीपीओ और रूस की रोसाटॉम का उल्लेख किया गया।
उन्होंने कहा कि इन कंपनियों के बीच तकनीक, सूचना प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ा काम BRICS देशों की बढ़ती तकनीकी क्षमता और बड़े घरेलू बाजार की तस्वीर पेश करता है।
पुतिन ने कहा कि रूस भी AI, स्वायत्त तकनीक, डिजिटल प्लेटफॉर्म और फिनटेक सहित कई क्षेत्रों में तकनीकी विकास को आगे बढ़ा रहा है।
पश्चिमी प्रतिबंधों पर रूस का पलटवार
पुतिन ने रूस और BRICS के आर्थिक रूप से अलग-थलग होने की धारणा को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि रूस पुराने और नए दोनों तरह के साझेदारों के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिए तैयार है।
उन्होंने पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों और व्यापार से जुड़ी पाबंदियों की भी आलोचना की। पुतिन के मुताबिक, मौजूदा वैश्विक प्रतिस्पर्धा अब केवल कंपनियों के बीच नहीं रह गई है, बल्कि देशों के स्तर पर भी इसका स्वरूप बदल रहा है।
उन्होंने व्यापार प्रतिबंधों, परिवहन मार्गों पर दबाव और द्वितीयक प्रतिबंधों को लेकर चिंता जताई। पुतिन ने दावा किया कि रूस पर 30 हजार से ज्यादा प्रतिबंध लगाए गए हैं। उनके अनुसार, इन चुनौतियों के बावजूद रूस ने अपने व्यापारिक साझेदारों और विदेशी कारोबार की दिशा में बदलाव करके अर्थव्यवस्था को संभालने की कोशिश की है।
BRICS को बताया वैश्विक सहयोग का मंच
पुतिन ने BRICS को केवल आर्थिक समूह के तौर पर सीमित नहीं रखने की बात कही। उन्होंने सरकारों, उद्योग जगत और शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
उनके अनुसार, व्यापार परिषद के जरिए बुनियादी ढांचे, वित्त, लॉजिस्टिक्स और तकनीक से जुड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि BRICS दुनिया के दूसरे देशों के साथ सहयोग के लिए खुला है और इसका बढ़ता प्रभाव किसी देश को वैश्विक अर्थव्यवस्था से बाहर करने के उद्देश्य से नहीं है।
Zaman Times