Indian Navy ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भले ही सीधे हमला नहीं किया, लेकिन उसकी समुद्री रणनीति और तैनाती ने पाकिस्तान पर जबरदस्त दबाव बना दिया था। रक्षा सूत्रों के अनुसार, भारतीय नौसेना ने ऐसी रणनीतिक घेराबंदी की थी कि पाकिस्तानी नौसेना अपने ही समुद्री क्षेत्र तक सीमित होकर रह गई।
आईएनएस विक्रांत की फॉरवर्ड तैनाती से बढ़ा दबाव
भारतीय नौसेना ने अपने कैरियर बैटल ग्रुप INS Vikrant को अग्रिम मोर्चे पर तैनात किया। इसके साथ कई सबमरीन और युद्धपोत भी अरब सागर में सक्रिय किए गए। नौसेना की पनडुब्बियां लंबे समय तक पाकिस्तान के समुद्री क्षेत्र के आसपास ऑपरेट करती रहीं और लगातार निगरानी बनाए रखी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तानी नौसेना अपनी एंटी-सबमरीन क्षमताओं और लंबी दूरी के निगरानी विमानों के बावजूद किसी भी भारतीय सबमरीन का पता नहीं लगा सकी। इसे भारतीय नौसेना की बड़ी रणनीतिक सफलता माना जा रहा है।
चार सबमरीन कमांडरों को मिला वीरता सम्मान
ऑपरेशन के दौरान साहस और रणनीतिक नेतृत्व दिखाने वाले चार सबमरीन कमांडरों को नौसेना मेडल (वीरता) से सम्मानित किया गया। इन अधिकारियों ने उच्च जोखिम वाले माहौल में अपने दल का नेतृत्व करते हुए दुश्मन की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए रखी।
तीनों दिशाओं से बनाया गया दबाव
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने थल, वायु और समुद्री मोर्चों पर दबाव की रणनीति अपनाई। पहले उरी हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक और पुलवामा के बाद बालाकोट एयरस्ट्राइक की गई थी। इसी क्रम में पाकिस्तान को आशंका थी कि अगला बड़ा जवाब समुद्र के रास्ते आ सकता है।
भारतीय नौसेना ने अपनी तैनाती इस तरह की थी कि जरूरत पड़ने पर पाकिस्तानी नौसेना के लगभग सभी प्रमुख ठिकाने और एसेट उसकी पहुंच में होते। इस दबाव के चलते पाकिस्तानी नौसेना को अपने हार्बर में ही सीमित रहना पड़ा।
पाकिस्तानी निगरानी विमान को लौटना पड़ा
रक्षा सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान का समुद्री निगरानी विमान ‘सी ईगल’ एटीआर-72 अरब सागर में भारतीय तैनाती की जानकारी जुटाने पहुंचा था। लेकिन भारतीय रडार ने उसे तुरंत ट्रैक कर लिया।
इसके बाद MiG-29K फाइटर जेट को कॉम्बैट एयर पेट्रोल के लिए लॉन्च किया गया। भारतीय लड़ाकू विमान ने पाकिस्तानी एयरक्राफ्ट को इंटरसेप्ट कर चेतावनी दी, जिसके बाद उसे वापस लौटना पड़ा।
अरब सागर में तैनात थे 36 से ज्यादा युद्धपोत
ऑपरेशन के दौरान उत्तरी अरब सागर में 36 से अधिक भारतीय युद्धपोत तैनात थे। इनमें डेस्ट्रॉयर, स्टील्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट, मिसाइल बोट और कई सबमरीन शामिल थीं।
आईएनएस विक्रांत का पूरा कैरियर बैटल ग्रुप नेटवर्क आधारित युद्ध प्रणाली से जुड़ा हुआ था, जिससे सभी युद्धपोत और विमान किसी भी खतरे का तुरंत जवाब देने के लिए तैयार थे।
आईएनएस विक्रांत की ताकत
INS Vikrant भारतीय नौसेना का अत्याधुनिक विमानवाहक पोत है, जिस पर वर्तमान में मिग-29K फाइटर जेट तैनात हैं। भविष्य में इसमें Dassault Rafale M विमान भी शामिल किए जाने की योजना है।
इसके अलावा इसमें एमएच-60 रोमियो, सीकिंग और चेतक हेलिकॉप्टर भी तैनात हैं। जहाज की सुरक्षा के लिए बराक-8 मिसाइल सिस्टम, ऑटोब्रेडा गन और क्लोज-इन वेपन सिस्टम लगाए गए हैं, जो दुश्मन की मिसाइलों और हवाई हमलों को रोकने में सक्षम हैं।
भारतीय नौसेना की इस रणनीतिक तैनाती ने यह स्पष्ट कर दिया कि समुद्री मोर्चे पर भारत की तैयारी और क्षमता क्षेत्रीय संतुलन में बड़ी भूमिका निभाती है।
Zaman Times