Breaking News

हाईकोर्ट ने लखनऊ नगर निगम का आदेश रद्द किया, कहा—प्रमाणपत्र को लेकर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता; दत्तक पुत्र को नौकरी देने से अधिकारियों ने किया था इंकार।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने लखनऊ नगर निगम के एक आदेश को रद्द कर दिया है। इसमें कहा गया था कि दत्तक पुत्र को नौकरी नहीं दी जा सकती है। कोर्ट ने कहा- अगर किसी के पास दत्तक ग्रहण विलेख (प्रमाणपत्र) है तो उस पर सवाल मत उठाएं। कोई भी प्रशासनिक अधिकारी पंजीकृत दत्तक ग्रहण विलेख की वैधता पर सवाल नहीं उठा सकता।

यह निर्णय न्यायमूर्ति श्रीप्रकाश सिंह ने शानू कुमार की ओर से दायर सेवा संबंधी याचिका पर दिया। शानू कुमार ने अपने दत्तक पिता, दिवंगत नगर निगम कर्मचारी रमेश की मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति की मांग की थी। नगर निगम ने शानू कुमार का दावा यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि दत्तक ग्रहण के समय उनकी आयु 18 वर्ष थी, जो हिंदू दत्तक एवं भरण-पोषण अधिनियम, 1956 के अनुरूप नहीं है।

प्रमाणपत्र की वैधता को केवल सिविल कोर्ट देख सकता है

न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि एक बार दत्तक ग्रहण विलेख पंजीकृत हो जाने के बाद, उसकी वैधता पर सुनवाई की शक्ति केवल सक्षम सिविल न्यायालय को है, न कि किसी प्रशासनिक प्राधिकारी को। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अधिनियम, 1956 की धारा 12 और 16 के तहत, दत्तक पुत्र को सभी प्रयोजनों के लिए पुत्र माना जाने का प्रावधान है।

अदालत ने नगर निगम के 2 सितंबर 2023 के आदेश को निरस्त करते हुए निर्देश दिया है कि याची के अनुकंपा नियुक्ति के दावे पर दो माह के भीतर पुनर्विचार किया जाए।

 

 

About Zaman-Admin

Check Also

गुरु में अडिग आस्था: बटुकों ने जताया भरोसा, शंकराचार्य मठ में लौटी रौनक

  प्रयागराज के माघ मेले के बाद काशी के श्री विद्या मठ में रहने वाले …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *