कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की विदेश नीति को लेकर कई सवाल उठाए हैं। श्रीनगर में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने पाकिस्तान और चीन के साथ भारत के मौजूदा रिश्तों के अलावा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी अपनी राय रखी।
अय्यर ने भारत-पाकिस्तान संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत एक तरफ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर युद्ध से बचने और बातचीत व कूटनीति को प्राथमिकता देने की बात करता है, लेकिन दूसरी तरफ पाकिस्तान के साथ सैन्य कार्रवाई भी करता है। उनके मुताबिक, इस तरह के विरोधाभास की वजह से भारत की विदेश नीति को लेकर सवाल खड़े होते हैं।
‘दुनिया हमें दोहरे रवैये वाला मान रही’
मणिशंकर अय्यर ने कहा कि भारत की विदेश नीति को लेकर उनकी चिंता काफी व्यापक है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ भारत दुनिया के सामने युद्ध से बचने की बात करता है, वहीं पाकिस्तान के साथ सैन्य टकराव की स्थिति पैदा होती है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत लगातार कूटनीति और बातचीत के जरिए विवादों को सुलझाने की बात करता है, लेकिन पाकिस्तान के साथ दोनों देशों के बीच नियमित कूटनीतिक संवाद और बातचीत का अभाव है।
अय्यर के मुताबिक, इसी वजह से भारत के रुख को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विरोधाभास की धारणा बन सकती है।
चीन को लेकर भी केंद्र पर सवाल
कांग्रेस नेता ने चीन के साथ भारत के संबंधों और क्वाड को लेकर भी केंद्र सरकार की नीति पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि भारत के क्वाड में शामिल होने से चीन की नाराजगी बढ़ी है। अय्यर ने अमेरिका के मौजूदा रुख का हवाला देते हुए सवाल किया कि अगर अमेरिका की नजर में क्वाड का महत्व पहले जैसा नहीं रहा है, तो ऐसी स्थिति में भारत की रणनीति को किस तरह देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति का आधार केवल रणनीतिक हित नहीं, बल्कि स्पष्ट और दीर्घकालिक दृष्टिकोण होना चाहिए।
‘यह रणनीतिक स्वायत्तता का सवाल नहीं’
मणिशंकर अय्यर ने भारत की मौजूदा विदेश नीति को रणनीतिक स्वायत्तता से जोड़ने पर भी सवाल उठाया। उनका कहना था कि मौजूदा परिस्थितियों में भारत अलग-अलग देशों के साथ अपने संबंधों का इस्तेमाल अपने हितों के मुताबिक करने की कोशिश कर रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस नीति में मूल्यों और नैतिकता की तुलना में लेन-देन को अधिक महत्व दिया जा रहा है।
चुनाव आयोग को लेकर खरगे से अलग राय
मणिशंकर अय्यर ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के चुनाव आयोग को लेकर दिए गए बयानों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर वह खरगे के विचारों से पूरी तरह सहमत नहीं हैं।
अय्यर ने कहा कि हाल के चुनावों तक उनका मानना रहा है कि चुनाव आयोग ने एक स्वायत्त संस्था के रूप में काम किया है। उनके अनुसार किसी संवैधानिक संस्था को स्वतंत्र बनाने के लिए अलग से कानून के जरिए उसे स्वायत्त घोषित करना जरूरी नहीं है।
नियुक्ति प्रक्रिया पर उठाए सवाल
हालांकि, अय्यर ने चुनाव आयुक्तों और न्यायपालिका से जुड़े पदों पर नियुक्तियों की प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता का सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं का दर्जा अपने आप में उनकी स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की भावना रखता है, लेकिन नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयुक्तों और न्यायाधीशों की नियुक्ति किस तरीके से की जा रही है, इस प्रक्रिया में पर्याप्त पारदर्शिता को लेकर बहस की जरूरत है।
इस तरह मणिशंकर अय्यर ने एक ही बातचीत में केंद्र सरकार की पाकिस्तान और चीन नीति के साथ-साथ देश की संवैधानिक संस्थाओं से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी राय सामने रखी।
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