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कन्नौज में बाढ़ का संकट गहराया, दो गांवों में पहुंचा पानी; 157 लोग बीमार

 

कन्नौज में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से बाढ़ का खतरा गहराता जा रहा है। नदी का पानी कासिमपुर और बख्शीपुरवा गांव तक पहुंच गया है। कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति बनने के बाद ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पानी जमा होने के कारण लोगों में डायरिया, बुखार और त्वचा संबंधी बीमारियों के मामले भी सामने आने लगे हैं।

स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने राहत और बचाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। जिले में 21 बाढ़ चौकियां सक्रिय की गई हैं, जबकि स्वास्थ्य विभाग की दो चिकित्सकीय टीमें प्रभावित इलाकों में भेजी गई हैं। स्वास्थ्य टीमों ने जलभराव वाले क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों की जांच की और जरूरत के अनुसार दवाएं उपलब्ध कराईं।

खतरे के निशान के करीब पहुंचा गंगा का पानी

गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है। जिले में नदी का जलस्तर 125.760 दर्ज किया गया है। यह खतरे के निशान से महज 21 सेंटीमीटर नीचे है। नरौरा बांध से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण आने वाले समय में जलस्तर और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

गुरुवार को नरौरा बांध से करीब 1,05,633 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इसका असर कन्नौज क्षेत्र में लगभग 48 घंटे बाद दिखाई देने की संभावना है। ऐसे में नदी के आसपास के गांवों में प्रशासन की नजर बनी हुई है।

घरों में घुसा पानी, गांव छोड़ने को तैयार नहीं ग्रामीण

गंगा का जलस्तर बढ़ने के बाद कासिमपुर और बख्शीपुरवा में पानी भर गया है। कासिमपुर में कुछ घरों के अंदर तक पानी पहुंच चुका है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में ग्रामीण अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए तैयार नहीं हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि वे अपने घर और सामान को छोड़ना नहीं चाहते। कई परिवार अभी भी जलभराव के बीच अपने घरों में रह रहे हैं। इससे किसी अप्रिय घटना की आशंका भी बनी हुई है। प्रशासन की ओर से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है।

जलभराव के बीच बढ़ी बीमारियों की चिंता

गांव में पानी जमा होने के बाद बच्चों और ग्रामीणों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ने लगी हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने प्रभावित इलाकों में शिविर लगाकर मरीजों की जांच की।

जांच के दौरान कुल 157 मरीज मिले। इनमें:

  • 14 मरीज डायरिया से पीड़ित पाए गए।
  • 33 लोगों में बुखार के लक्षण मिले।
  • 44 मरीज त्वचा संबंधी बीमारी से प्रभावित मिले।
  • 66 लोगों में अन्य स्वास्थ्य समस्याएं पाई गईं।

सभी मरीजों को आवश्यक दवाएं दी गईं। इसके अलावा प्रभावित परिवारों को 155 क्लोरीन टैबलेट और 120 ओआरएस पैकेट भी वितरित किए गए।

स्वास्थ्य विभाग ने तैयार रखा पर्याप्त स्टॉक

बाढ़ के कारण संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जरूरी दवाओं और अन्य सामग्री का पर्याप्त भंडारण किया है। विभाग के पास करीब 20 हजार क्लोरीन टैबलेट उपलब्ध हैं।

इसके साथ ही 2,27,975 ओआरएस पैकेट, 200 किलोग्राम ब्लीचिंग पाउडर और 1,305 हाइपोक्लोराइट वायल का स्टॉक रखा गया है। मच्छरों और जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए कीटनाशक सामग्री भी उपलब्ध कराई गई है।

विभाग के पास Biovac की 200 लीटर और Temephos की 220 लीटर मात्रा उपलब्ध बताई गई है। प्रशासन का कहना है कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार निगरानी में रखा जा रहा है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त टीमों को भी लगाया जा सकता है।

प्रशासन की गांवों पर नजर

गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने के कारण आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर होने की आशंका है। प्रशासन की टीमें प्रभावित गांवों में हालात पर नजर रख रही हैं। ग्रामीणों को साफ पानी पीने, जलभराव वाले पानी से बचने और बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेने की सलाह दी जा रही है।

फिलहाल सबसे बड़ी चिंता कासिमपुर और बख्शीपुरवा में बढ़ता जलभराव है। नरौरा बांध से छोड़े गए पानी का असर आने के बाद नदी का जलस्तर और बढ़ता है या नहीं, इस पर प्रशासन की लगातार नजर बनी हुई है।

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