नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद शशि थरूर को एक बार फिर संसद की विदेश मामलों से जुड़ी स्थायी समिति की अध्यक्षता की जिम्मेदारी सौंपी गई है। तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सांसद थरूर की दोबारा नियुक्ति के बाद उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत की विदेश नीति और भविष्य की दिशा को लेकर गंभीर चर्चा जरूरी है।
शशि थरूर ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति की अध्यक्षता जारी रखने का अवसर मिलना उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि वह तेजी से बदलती और चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत के आगे के रास्ते पर गंभीर तथा रचनात्मक विचार-विमर्श के लिए उत्सुक हैं।
विदेश मामलों की समिति में 31 सदस्य
विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति के सदस्यों की सूची पहले ही जारी की जा चुकी है। समिति में लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों के सांसदों को शामिल किया गया है।
लोकसभा से शशि थरूर समेत कुल 21 सदस्यों को समिति में जगह दी गई है। हालांकि लोकसभा के हिस्से में एक सीट अभी खाली है। वहीं राज्यसभा से 10 सांसद समिति के सदस्य बनाए गए हैं।
इस तरह समिति में कुल 31 सदस्य शामिल हैं, जबकि लोकसभा की एक सीट फिलहाल रिक्त है।
लोकसभा से इन सांसदों को मिली जगह
विदेश मामलों की स्थायी समिति में लोकसभा से डीके अरुणा, विजय बघेल, अभिषेक बनर्जी, अरुण गोविल, दीपेंद्र सिंह हुड्डा, नवीन जिंदल, सुब्रायन के., के. नवास कनि, बाल्या मामा सुरेश गोपीनाथ म्हात्रे, ब्रिजेंद्र सिंह ओला, असदुद्दीन ओवैसी, डॉ. प्रदीप कुमार पानिग्रही, मितेशभाई रमेशभाई पटेल, रविशंकर प्रसाद, वाई. एस. अविनाश रेड्डी, अपराजिता सारंगी, पुष्पेंद्र सरोज, प्रनीति सुशीलकुमार शिंदे, बांसुरी स्वराज और डॉ. शशि थरूर को शामिल किया गया है।
लोकसभा कोटे की एक सीट अभी खाली है, जिसे बाद में भरा जा सकता है।
राज्यसभा से 10 सांसद समिति का हिस्सा
राज्यसभा से भी 10 सांसदों को विदेश मामलों की स्थायी समिति में शामिल किया गया है। इनमें डॉ. जॉन ब्रिटास, राघव चड्ढा, सागरिका घोष, डॉ. के. लक्ष्मण, सतनाम सिंह संधू, हर्षवर्धन श्रृंगला, राजीव शुक्ला, राजेश परमानंद शुक्ला, रतनजीत प्रताप नारायण सिंह और डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी शामिल हैं।
विदेश नीति से जुड़े अहम मुद्दों पर होगी चर्चा
संसद की विदेश मामलों की स्थायी समिति देश की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श करती है। बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारत के सामने व्यापार, सुरक्षा, कूटनीति और विभिन्न देशों के साथ संबंधों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं।
ऐसे में शशि थरूर को दोबारा समिति की कमान मिलने के बाद आने वाले समय में विदेश नीति से जुड़े मुद्दों पर होने वाली चर्चाओं पर राजनीतिक और कूटनीतिक नजरें बनी रहेंगी।
थरूर ने अपनी प्रतिक्रिया में भी इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा वैश्विक अस्थिरता के दौर में भारत के भविष्य की दिशा को लेकर गंभीर और रचनात्मक संवाद की जरूरत है।
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