सीएम डैशबोर्ड की ताजा रैंकिंग में कानपुर जिले को प्रदेश स्तर पर 54वां स्थान मिला है। दिसंबर माह की रिपोर्ट में जिले ने 10 अंकों का सुधार करते हुए कुल 8.49 अंक हासिल किए हैं। यह रैंकिंग विकास कार्यों और राजस्व से जुड़े मानकों के आधार पर तैयार की गई है। हालांकि सुधार के बावजूद राजस्व से संबंधित प्रदर्शन अभी भी चिंता का विषय बना हुआ है।
कुछ विभागों में जिले का प्रदर्शन संतोषजनक रहा है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन के मामलों में कानपुर की स्थिति बेहतर मानी गई है। औषधि विक्रय लाइसेंस जारी करने, सैंपलिंग और कार्रवाई के मामलों में जिला प्रदेश के टॉप-5 में शामिल रहा। इसके साथ ही हाउस टैक्स और वाटर टैक्स कलेक्शन में 118.41 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज करते हुए कानपुर ने शीर्ष जिलों में अपनी जगह बनाई।
वहीं स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 97.81 प्रतिशत प्रगति के साथ जिला निचले पायदान के टॉप-5 जिलों में रहा, जो अपेक्षित प्रदर्शन से पीछे माना जा रहा है।
जनसुनवाई बनी सबसे बड़ी चुनौती
जनसुनवाई (आईजीआरएस) के मामलों में कानपुर की स्थिति काफी कमजोर रही। जिला इस श्रेणी में प्रदेश के बॉटम-5 जिलों में शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार 3159 मामलों में लोगों ने असंतोषजनक फीडबैक दिया, जो जन शिकायतों के निस्तारण में कमियों की ओर इशारा करता है।
इसके विपरीत रामपुर, जालौन, पीलीभीत, शाहजहांपुर और बरेली जैसे जिलों ने जनसुनवाई के मामले में बेहतर प्रदर्शन करते हुए प्रदेश के टॉप-5 में जगह बनाई है।
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