उत्तर प्रदेश में बारिश और बाढ़ का असर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। प्रदेश की कई नदियों का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में पानी भर गया है। रिपोर्ट के मुताबिक 8 नदियां फिलहाल खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं। कई गांवों में पानी पहुंचने से लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा है।
नेपाल की ओर से छोड़े गए पानी का असर भी प्रदेश के कुछ सीमावर्ती जिलों में दिखाई दे रहा है। कुशीनगर में गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से आसपास के गांव प्रभावित हुए हैं। वहीं, कई जगह संपर्क मार्गों पर पानी भरने के कारण आवागमन प्रभावित हुआ है।
कुशीनगर में गंडक नदी का बढ़ा जलस्तर
नेपाल से पानी छोड़े जाने के बाद कुशीनगर क्षेत्र में गंडक यानी नारायणी नदी का जलस्तर बढ़ गया। बाढ़ के पानी से दो गांवों के करीब 1,400 परिवार प्रभावित बताए जा रहे हैं।
कई परिवारों ने सुरक्षित स्थानों की ओर रुख किया है। कुछ लोगों ने तटबंधों पर अस्थायी रूप से शरण ली है। प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों पर नजर रखी जा रही है।
कई जिलों में रास्तों पर पानी
गोंडा और बदायूं समेत कुछ इलाकों में छोटे पुलों और संपर्क मार्गों के ऊपर से पानी बहने की स्थिति बनी हुई है। स्थानीय लोगों को पानी के बीच से आवागमन करना पड़ रहा है।
सीतापुर में सरायन और पिरई नदियों का जलस्तर भी चिंता बढ़ा रहा है। नदी का पानी खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने के कारण आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
कई परिवारों ने घरेलू सामान को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए ट्रैक्टर और जेसीबी की मदद ली।
उन्नाव और अमरोहा में भी बारिश का असर
उन्नाव के जलभराव वाले क्षेत्रों में स्थिति मुश्किल बनी हुई है। कुछ स्थानों पर लोगों को मकानों और दुकानों की छतों पर रहने की नौबत आई।
अमरोहा में बारिश के बीच एक जर्जर मकान की दीवार अचानक गिर गई। गनीमत रही कि समय रहते आसपास के लोगों को सतर्क कर दिया गया और बड़ा हादसा टल गया।
बदायूं में पुरानी इमारत भरभराकर गिरी
बदायूं में बारिश और जलभराव के बीच एक करीब 70 साल पुरानी दो मंजिला इमारत अचानक ढह गई। बताया गया कि इमारत कुछ ही सेकंड में पूरी तरह जमीन पर आ गई।
पुरानी और कमजोर इमारतों को लेकर स्थानीय स्तर पर लोगों में चिंता बढ़ी है। प्रशासन ने ऐसे भवनों को लेकर सावधानी बरतने की अपील की है।
बरेली में नदी में समाया पानी की टंकी से जुड़ा कमरा
बरेली में किच्छा नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण जल जीवन मिशन की पानी की टंकी से जुड़ा एक कमरा नदी की धारा में समा गया। इससे पहले पानी की टंकी के भी बहने की जानकारी सामने आई थी।
लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण नदी किनारे रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।
मुरादाबाद में छत पर दिखे तीन तेंदुए
मुरादाबाद में बारिश और जलभराव के बीच एक मकान की छत पर एक साथ तीन तेंदुए दिखाई देने से लोगों में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी।
बारिश और बाढ़ के दौरान जंगली जानवरों के आबादी वाले इलाकों की ओर आने की घटनाएं बढ़ सकती हैं। ऐसे में लोगों को अकेले बाहर निकलने से बचने और वन विभाग की सलाह मानने को कहा गया है।
आज 17 जिलों में बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के 17 जिलों में बारिश की संभावना जताई है। हालांकि, पिछले 24 घंटे के दौरान लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज और वाराणसी समेत प्रदेश के कई बड़े शहरों में मौसम अपेक्षाकृत साफ रहा।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार बंगाल की खाड़ी से बना सिस्टम अब कमजोर हो चुका है और इसका असर धीरे-धीरे कम हो रहा है।
अगले 24 घंटे में कम होगा बारिश का असर
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रदेश में लगातार कई दिनों से हो रही बारिश अब कमजोर पड़ने लगी है। अगले 24 घंटे में बारिश का प्रभाव काफी कम होने की संभावना है।
नेपाल सीमा से जुड़े तराई इलाकों में हल्की बारिश जारी रह सकती है। इसके बाद अक्टूबर की शुरुआत में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम साफ रहने और धूप निकलने का अनुमान है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में क्या सावधानी बरतें?
- तेज बहाव वाले पानी में पैदल या वाहन से जाने से बचें।
- नदी और नालों के आसपास अनावश्यक रूप से न जाएं।
- बच्चों को जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रखें।
- बिजली के गिरे तारों और पानी में डूबे बिजली उपकरणों से दूरी बनाए रखें।
- जरूरी सामान और दस्तावेज सुरक्षित स्थान पर रखें।
- प्रशासन और मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान दें।
- किसी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन और राहत दल से संपर्क करें।
फिलहाल नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। बारिश कम होने के बावजूद नदियों का जलस्तर तुरंत सामान्य नहीं होता, इसलिए बाढ़ का पानी उतरने तक सतर्क रहना जरूरी है।
Zaman Times