बांदा: जिले में नदियों का जलस्तर बढ़ने के बाद बाढ़ की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन सतर्क हो गया है। जिलाधिकारी अमित आशेरी ने लोगों से सावधानी बरतने और किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने की अपील की है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर भरोसा न करें और बाढ़ से जुड़ी जानकारी के लिए केवल आधिकारिक माध्यमों पर निर्भर रहें।
प्रशासन की ओर से लोगों को सलाह दी गई है कि संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जरूरी सामान पहले से तैयार रखें। इसमें महत्वपूर्ण दस्तावेज, नियमित दवाइयां, टॉर्च, मोबाइल फोन, चार्जर, सूखा खाद्य पदार्थ और पर्याप्त मात्रा में पीने का पानी शामिल है।
तेज बहाव वाले पानी से रहें दूर
जिला प्रशासन ने लोगों को नदी, नाले और पुल-पुलियों पर तेज बहाव वाले पानी से विशेष सावधानी बरतने को कहा है। ऐसे स्थानों को पैदल पार करने या किसी वाहन से निकलने की कोशिश न करने की सलाह दी गई है।
अधिकारियों के मुताबिक बाढ़ के दौरान पानी की वास्तविक गहराई और बहाव का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है।
इसके अलावा लोगों से टूटे या गिरे हुए बिजली के तारों से दूरी बनाए रखने और पानी के संपर्क में आए बिजली के उपकरणों को न छूने की अपील की गई है।
क्षतिग्रस्त मकान और पशुबाड़े पर मिलेगी मदद
अपर जिलाधिकारी कुमार धर्मेंद्र ने बताया कि लगातार हो रही बारिश के चलते कुछ इलाकों में मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचनाएं सामने आ रही हैं। आपदा की स्थिति में पात्र प्रभावित लोगों को राज्य आपदा राहत कोष के निर्धारित नियमों के तहत आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
करीब 15 प्रतिशत तक आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त कच्चे मकान के लिए 4,000 रुपये की सहायता का प्रावधान है। वहीं घर से जुड़े पशुबाड़े के क्षतिग्रस्त होने पर 3,000 रुपये की आर्थिक मदद दी जा सकती है।
प्रभावित परिवार नुकसान की सूचना आपदा कंट्रोल रूम को देकर सहायता के लिए प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
पशुओं की मौत पर भी मुआवजे का प्रावधान
आपदा के दौरान पशुओं की मृत्यु होने पर भी निर्धारित मानकों के अनुसार आर्थिक सहायता दी जाती है। दूध देने वाले पशुओं, जैसे गाय, भैंस, ऊंट और याक की मृत्यु होने पर 37,500 रुपये की सहायता का प्रावधान है।
वहीं भेड़, बकरी और सुअर की मृत्यु पर 4,000 रुपये तथा दूध न देने वाले पशुओं जैसे बैल, घोड़े और ऊंट की मृत्यु पर 32,000 रुपये तक की सहायता दी जाती है।
बछड़ा, गधा और टट्टू जैसे पशुओं की मृत्यु होने पर 20,000 रुपये की आर्थिक मदद दिए जाने का प्रावधान है।
जनहानि होने पर परिवार को 4 लाख रुपये की सहायता
प्रशासन के मुताबिक आपदा के दौरान किसी व्यक्ति की मृत्यु होने की स्थिति में पात्र मृतक के परिवार को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बाढ़ या जलभराव की स्थिति में घबराने के बजाय सुरक्षित स्थान पर जाएं और प्रशासन की ओर से दिए जा रहे निर्देशों का पालन करें। किसी भी तरह की आपात स्थिति में संबंधित अधिकारियों और आपदा नियंत्रण व्यवस्था को तुरंत सूचना देने की सलाह दी गई है।
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