अयोध्या के रामनवमी मेले में श्रीरामवल्लभाकुंज,सियाराम किला,कनक भवन और हनुमान किला में भगवद कथाओं की अमृत वर्षा हो रही है।
अयोध्या के रामनवमी मेले में श्रीरामवल्लभाकुंज,सियाराम किला,कनक भवन और हनुमान किला में भगवद कथाओं की अमृत वर्षा हो रही है। श्रीरामवल्लभाकुंज में महंत राम शंकर दास वेदांती ने भगवान शिव की राम भक्ति का वर्णन किया।उन्होंने कहा कि शिव ने श्रीराम के चरण कम
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श्रीरामवल्लभाकुंज में श्रीराम कथा सुनते भक्त और संत।
उन्होंने कहा कि पार्वती जी खिलौना बेचने दशरथ के महल में पहुंची और उन्होंने माता कौशल्या को रामलला को गोद में लेने की इच्छा की।उनकी अपनी इच्छा पूरी होने के बाद पार्वती आनंद से भर उठीं।इसके बाद कैलाश पर्वत पर जाकर उन्होंने महादेव से श्रीराम लला को गोद में लेने से उपजे आनंद का वर्णन किया।
सियाराम किला में अखिल भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष ,पूर्व सांसद बृज भूषण शरण सिंह का कथा मंच पर स्वागत करते देश के प्रसिद्ध कथावाचक स्वामी प्रभंजनानंद शरण।
कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष ,पूर्व सांसद बृज भूषण शरण सिंह सियाराम किला पहुंचे
सियाराम किला झुनकी घाट के दिव्य सत्संग हॉल में देश के प्रसिद्ध कथावाचक स्वामी प्रभंजनानंद की श्रीराम कथा का शुभारंभ महंत करुणानिधान शरण,खाक चौक के महंत बृजमोहन दास ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर अयोध्या के संतों का सानिध्य एवं आशीर्वचन मिला।
इस अवसर पर अखिल भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष ,पूर्व सांसद बृज भूषण शरण सिंह , हनुमान गढ़ी के सरपंच महंत रामकुमार दास,वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास, पार्षद प्रतिनिधि प्रियेश दास आदि ने कथा व्यास का पूजन किया।
हनुमान किला में श्रीराम महायज्ञ के कुंड में आहुति करते महंत परशुराम दास।
हनुमान किला में हुआ श्रीराम महायज्ञ के लिए अरण्य मंथन
परम तपस्वी अमरकंटक के तपोनिष्ठ बर्फानी दादा महाराज के आशीर्वाद से संकट मोचन हनुमान किला में श्रीराम महायज्ञ, श्रीराम चरित मान का नवान्ह पारायण और श्रीमद् भागवत कथा की त्रिवेणी बह रही हैै। महंत परशुराम दास के संयोजन में श्रीराम महायज्ञ, अखंड दुर्गा सप्तशती पाठ, श्री राम नाम संकीर्तन भी हो रहा है।
महंत परशुराम दास ने पंचांग पूजन, बेदी पूजन, अरणी मंथन कर अग्नि देव को प्रकट किया और उसके उपरांत भगवान श्रीराम नाम के महामंत्र से हवन कुंड में आहुतियां पढ़ने लगी। आचार्य जी ने बताया कि सवा लाख श्री राम महामंत्र आहुतियां डाली जाएगी। मंदिर परिसर में नव निर्मित हाल में शाम के सत्र में श्रीमद् भागवत कथा की अमृत वर्षा हो रही है। व्यास पीठ से महंत गणेश दास महाराज ने कहा कि श्रीमद् भागवत अमृत कलश है जिसके श्रवण मात्र से जीव का कल्याण हो जाता है। कथा के तीसरे दिन श्री महाराज जी ने कहा कि आप सब पर ठाकुर जी की कृपा है। जिसकी वजह से आप अवध धाम में कथा का आनंद ले रहे है। श्रीमद भगवत कथा का रसपान कर पा रहें हैं क्योंकि जिन्हें गोविंद जितना प्रदान करते है उसे उतना ही मिलता है।
भागवत कथा से कुछ पाना,सीखना चाहते हैं तो कथा में प्यासे बन कर आएं-महंत गणेश दास
उन्होंने कहा कि आप भागवत कथा सुनकर कुछ पाना चाहते हैं, कुछ सीखना चाहते है तो कथा में प्यासे बन कर आए। कुछ सीखने के उद्देश्य से, कुछ पाने के उद्देश्य से आएं, तो ये भागवत कथा जरूर आपको कुछ नहीं बल्कि बहुत कुछ देगी।कार्यक्रम के आयोजन महंत परशुराम दास ने कथा में उपस्थित संतों का स्वागत सम्मान किया और कहा कि हम सबके आराध्य प्रभु श्रीराम की कृपा सभी कार्य संपन्न होते हैं और उन्हीं के आदेश से हनुमान जी महाराज की अध्यक्षता में सभी काम संपन्न हो रहे हैं। कथा के समापन के अवसर पर मुख्य यजमान महंत जयराम दास महाराज ने आरती उतारी प्रसाद वितरण किया गया। यज्ञाचार्य आचार्य कुलदीप तिवारी ने प्रथम प्रथम दिवस के अनुष्ठान को वैदिक विद्वानों के साथ संपन्न कराया। इस अवसर पर प्रमुख रूप से राम जी भाई पाल मुंबई, अमर सिंह अयोध्या, राजमणि सिंह अयोध्या, डॉ एमपी यादव के साथ सैकड़ों शिष्य परिवार उपस्थित रहे।
कनक भवन परिसर में श्रीराम कथा कहते हरिओम तिवारी।
प्रसिद्ध कथावाचक राघव चरण अनुरागी हरिओम तिवारी कनक भवन मंदिर परिसर में श्री राम जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित रामकथा कह रहे हैं।उन्होंने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित भागवत कथा मनुष्य के मन में उठने वाले हर उद्वेगों का जवाब है। भागवत कथा के अध्ययन से मनुष्य के मन में उठने वाले विचारों को शांति की प्राप्ति होती है।
गुरु ही ईश्वर से जुड़ने का सीधा व सरल माध्यम
उन्होंने कहा कि गुरु की महत्ता पर बोलते हुये कहा कि इस नश्वर दुनिया से पार लगाने का परम माध्यम अगर कोई है तो वो हमारे गुरु है। गुरु ही ईश्वर से जुड़ने का सीधा व सरल माध्यम हैं। हरिओम ने कहा कि सत्संग जीवन को निर्मल और पवित्र बनाता है। यह मन के बुरे विचारों व पापों को दूर करता है। ‘सत्संगति मूर्खता को हर लेती है, वाणी में सत्यता का संचार करती है। दिशाओं में मान-सम्मान को बढ़ाती है, चित्त में प्रसन्नता को उत्पन्न करती है और दिशाओं में यश को विकीर्ण करती है।
इस अवसर पर शिव ओम तिवारी, संदीप तिवारी और श्रद्धालुगण उपस्थित रहे।
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