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इंडिगो फ्लाइट कैंसिलेशन पर पायलट एसोसिएशन ने उठाए सवाल, खुलकर बताया समस्या आखिर कहाँ है।

 


एयर लाइन पायलट्स एसोसिएशन ने बड़ा दावा किया है. यह दावा फ्लाइट कैंसिलेशन को लेकर किया गया है. इसमें एसोसिएशन ने पायलटों की कमी, प्लानिंग में गलती और दबाव की रणनीति का जिक्र किया है. दरअसल, इंडिगो फ्लाइट कैंसिलेशन के बाद से विवाद बढ़ा, जिसके बाद ALPA ने अपनी तरफ से बयान जारी किया.

क्या किया ALPA ने दावा
ALPA का दावा है कि फ्लाइट कैंसिलेशन का पैटर्न बताता है कि एयरलाइंस इस स्थिति का इस्तेमाल रेग्युलेटर (DGCA) पर दबाव डालने के लिए कर सकती है, ताकि FDTL नियमों में ढील मिल सके.

“पायलटों की कमी” बताना असल मुद्दे से ध्यान हटाना है. ALPA ने कहा कि नया Flight Duty Time Limit (FDTL) नियम पहले ही सभी एयरलाइंस को बता दिया गया था. DGCA ने यह नियम जनवरी 2024 में जारी किया था और एयरलाइंस को तैयारी के लिए पूरा समय मिला था.

रोस्टर 15 दिन पहले बनाने का नियम
एयरलाइंस  जिनमें इंडिगो भी शामिल है, ने क्रू रोस्टर और स्टाफिंग की तैयारी देर से शुरू की. 15 दिन पहले रोस्टर बनाने का नियम है, पर कंपनियों ने इसे समय पर नहीं किया.  ALPA के अनुसार, नए नियमों में आराम का समय बढ़ा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि एयरलाइन के पास पर्याप्त पायलट न हों.

एसोसिएशन ने इसे “immature pressure tactic” कहा है और कहा कि ऐसा करना फ्लाइट सेफ्टी के साथ समझौता होगा.

एक और मुद्दे का ALPA ने किया जिक्र
ALPA ने एक और बड़ा मुद्दा उठाया — Slot Hoarding यानी एयरलाइंस द्वारा हवाईअड्डे पर स्लॉट लेकर उन्हें पर्याप्त रूप से उपयोग न करना. स्लॉट एयरलाइंस को उनके पुराने उपयोग (grandfather rights) के आधार पर मिलते हैं. अगर कोई एयरलाइन अपनी घोषित शीतकालीन उड़ानों को नहीं उड़ाती  तो यह “प्रीमियम स्लॉट जमाकर रखने” जैसा है. यह प्रतिस्पर्धा में गलत फायदा देता है. अगर कोई एयरलाइन लगातार कम स्लॉट उपयोग करती है, तो DGCA के पास अधिकार है कि वह उन स्लॉट को वापस ले, और उन्हें दूसरी एयरलाइंस को दे, जिनके पास ऑपरेट करने की क्षमता हो.

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