भारत की सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने शुक्रवार को अमेरिका स्थित जनरल इलेक्ट्रिक (GE) के साथ 1 बिलियन डॉलर की डिफेंस डील की है. इसके तहत HAL को तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) Mk-1A के लिए जेट इंजन (F404-GE-IN20) की सप्लाई की जाएगी. यह डील यूएस के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारतीय उत्पादों पर लगाए गए कुल 50 फीसदी टैरिफ के बाद हुए तनाव के बीच हुई है.
कब से शुरू होगी इंजनों की सप्लाई?
HAL के अनुसार, कंपनी ने 97 LCA Mk-1A फाइटर जेट विमानों के सपोर्ट पैकेज और इंजन सप्लाई के लिए जनरल इलेक्ट्रिक कंपनी के साथ करार किया है. इन इंजनों की सप्लाई साल 2027 से शुरू हो जाएगी और 2032 तक ऑर्डर पूरे किए जाएंगे. रक्षा मंत्रालय ने सितंबर 2025 में एचएएल के साथ 62370 करोड़ रुपये का करार किया था, जिसके तहत भारतीय वायुसेना के लिए 97 तेजस Mk-1A फाइटर जेट खरीदे जाएंगे.
तेजस सिंगल इंजन वाला मल्टीरोल फाइटर जेट है, जिसे अधिक खतरे वाले हवाई अभियानों के लिए डिजाइन किया गया है. यह एयर डिफेंस, समुद्री टोही अभियान और हमला करने जैसे अभियानों को अंजाम देने में सक्षम है. एचएएल जीई एफ-404 इंजन का उपयोग एलसीए एमके-1ए विमानों के पहले बैच में भी कर रही है.
Hindustan Aeronautics Limited (HAL) has entered into an agreement with M/s. General Electric Company, USA, on 7th November 2025 for the supply of 113 Nos of F404-GE-IN20 engines and support package for execution of 97 LCA Mk1A programme. pic.twitter.com/zB4BVGP0LK
— HAL (@HALHQBLR) November 7, 2025
तेजस MK-1A विमानों की आपूर्ति में रुकावट
रक्षा मंत्रालय ने फरवरी 2021 में एचएएल के साथ 48,000 करोड़ रुपये का अनुबंध किया था, जिसके तहत 83 तेजस MK-1A विमान खरीदे जाने थे. हालांकि, जीई एयरोस्पेस द्वारा इंजन आपूर्ति में देरी के कारण इन विमानों की आपूर्ति में रुकावट आई. वायुसेना वर्तमान में अपने लड़ाकू विमानों के बेड़े की घटती संख्या की भरपाई के लिए तेजस विमानों की समय पर आपूर्ति चाहती है. फिलहाल वायुसेना के पास 31 स्क्वाड्रन हैं, जबकि उसकी जरूरत 42 स्क्वाड्रन की है.
इस डील से भारत का फायदा
इस डील से एचएएल को 212 जीई-404 इंजनों की अपनी पूरी आवश्यकता को पूरा करने में मदद मिलेगी, जिससे इंजन आपूर्ति में किसी भी प्रकार की देरी से बचा जा सकेगा. हाल ही में एचएएल और रूस की पब्लिक ज्वाइंट स्टॉक कंपनी यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन ने एसजे-100 सिविल एयरक्राफ्ट के उत्पादन के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता किया.
रूसी कंपनी और HAL के बीच डील
एसजे-100 एक ट्विन-इंजन, नैरो-बॉडी कम्यूटर एयरक्राफ्ट है. इसका उपयोग क्षेत्रीय और शॉर्ट-हॉल यात्राओं के लिए किया जाता है. अब तक दुनियाभर में 200 से अधिक विमान निर्मित किए जा चुके हैं और इन्हें 16 से अधिक कॉमर्शियल एयरलाइंस की ओर से संचालित किया जा रहा है. यह विमान भारत की उड़ान योजना के तहत क्षेत्रीय हवाई संपर्क को बढ़ावा देने में गेम चेंजर साबित होगा. समझौते के तहत, एचएएल को भारत में घरेलू ग्राहकों के लिए एसजे-100 विमान का निर्माण करने का विशेष अधिकार मिलेगा.
Zaman Times