जांच एजेंसियों ने लद्दाख की पूर्वी सीमाओं के जरिए संचालित एक चीनी प्रायोजित सोने की तस्करी के गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस साजिश का खुलासा प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने किया, जो बड़े पैमाने पर सोने की तस्करी से जुड़े मामले की जांच कर रहा था, जिसमें एक हजार किलोग्राम से ज्यादा सोना बरामद हुआ था।
प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास बड़ी मात्रा में सोने की ज़ब्ती की जांच से पता चला कि एक बड़ा सीमा पार सोने की तस्करी का नेटवर्क भारत में सक्रिय था। यह गिरोह 2023 और 2024 के दौरान भारत में एक हजार किलोग्राम से अधिक सोना भेजने के लिए जिम्मेदार था।
108 सोने की छड़ों के साथ पकड़ा गया चीनी तस्कर
यह मामला तब सामने आया जब भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के गश्ती दल ने पूर्वी लद्दाख के चांगथांग उप-क्षेत्र के सिरिगापले में दो लोगों को रोका। दोनों की पहचान त्सेरिंग चंबा और स्टैनज़िन दोरग्याल के रूप में हुई और उनके पास से 108 सोने की छड़ें बरामद की गईं, जिनमें से प्रत्येक का वजन एक किलोग्राम था।
माल ले जाने के लिए कुलियों का इस्तेमाल
ईडी ने बताया कि इस रैकेट का मास्टरमाइंड भारत का तेंदु ताशी था, जो भू-चुम-चुम नामक एक चीनी नागरिक के साथ मिलकर काम करता था। चीनी संपर्क ने कुलियों की मदद से तिब्बत से भारत में सोना पहुंचाया। तिब्बत निवासी तेनजिन खंडप नामित रिसीवर और ट्रांसपोर्टर था, जबकि उसका चाचा तेनजिन सम्फेल माल ढोने के लिए कुलियों का इंतजाम करता था।
जांच में खुलासा हुआ कि 2023 और 2024 के बीच इस गिरोह ने लगभग 800 करोड़ रुपये मूल्य का 1,064 किलोग्राम विदेशी सोना भारत में तस्करी किया। लद्दाख से दिल्ली लाए जाने के बाद यह सोना ज्वैलर्स और डीलरों को बेच दिया गया। चीनी आपूर्तिकर्ता को भुगतान क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन, विशेष रूप से USDT (टीथर) के जरिए किया गया।
आगे की जांच जारी
ईडी ने अपनी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत दिल्ली-एनसीआर में पांच और लद्दाख में एक जगह पर छापेमारी की। अधिकारियों के मुताबिक, इस नेटवर्क ने पकड़ से बचने के लिए रसद, निपटान और भुगतान की एक परिष्कृत प्रणाली विकसित कर रखी थी। एजेंसी ने कहा कि अपराध की आय का पता लगाने और सिंडिकेट से जुड़े सभी लोगों की पहचान करने के लिए आगे की जांच जारी है।
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