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उत्तर कोरिया में ‘आइसक्रीम’ शब्द पर बैन, किम जोंग का नया फरमान और वजह।

 

अपने अजीबोगरीब फैसलों को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाले उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन इन दिनों फिर से सुर्खियों में हैं. उन्होंने अपने देश में कई अंग्रेजी शब्दों पर बैन लगा दिया है. उनके ऐसा करने के पीछे का मकसद देश में पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव को रोकना है.

किम जोंग उन ने ‘आइसक्रीम’, ‘हैम्बर्गर’, ‘कराओके’ जैसे सामान्य शब्दों को बैन कर दिया है. इन शब्दों की जगह स्थानीय शब्दावली अपनाने का आदेश दिया है. यह कदम देश में बढ़ती सख्ती और विदेशी प्रभाव को पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम माना जा रहा है.

विदेशी शब्दों पर लगाई पाबंदी
रिपोर्ट्स के अनुसार, वोनसान बीच-साइड रिसॉर्ट में काम करने वाले टूर गाइड्स को विदेशी व दक्षिण कोरियाई शब्दों के इस्तेमाल से मना किया गया है. गाइड्स को विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल किया जा रहा है, जिसमें उन्हें सरकारी नारों और वाक्यांशों को याद करना अनिवार्य किया गया है. उदाहरण के लिए, ‘हैम्बर्गर’ के स्थान पर उन्हें ‘दाजिन-गोई ग्योप्पपंग’ (दोहरी ब्रेड के साथ ग्राउंड बीफ) कहना होगा. ‘आइसक्रीम’ के लिए ‘एसुकिमो’ (Eskimo) शब्द का इस्तेमाल करना अनिवार्य है, जबकि ‘कराओके मशीन’ को ‘ऑन-स्क्रीन अकम्पेनिमेंट मशीन’ कहा जाएगा.

पहले से भी लागू हैं कई कड़े प्रतिबंध
यह पहली बार नहीं है जब उत्तर कोरिया ने इस तरह की अजीब और सख्त नीतियां लागू की हों. देश में विदेशी फिल्में और टीवी ड्रामे देखने या साझा करने के लिए मौत की सजा तक दी गई है. 2023 में देश छोड़कर भागी एक महिला ने बीबीसी को बताया था कि उसके तीन दोस्तों को सिर्फ इसलिए फांसी की सजा दी गई क्योंकि उनके पास दक्षिण कोरियाई ड्रामे थे.

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में हुआ क्या खुलासा ?
हाल ही में जारी संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट ने यह भी पुष्टि की है कि पिछले दस वर्षों में विदेशी मीडिया के इस्तेमाल पर प्रतिबंधों में और भी सख्ती आ गई है. रिपोर्ट में बताया गया कि घरेलू छापे, सार्वजनिक फांसी और कठोर सजा के जरिए विदेशी मीडिया का इस्तेमाल रोकने के लिए तानाशाही ने भय कायम रखा है.

प्रतिबंधों के बावजूद अवैध माध्यमों से मिल रहा कंटेंट
कोरोना वायरस  महामारी के दौरान कुछ उत्तर कोरियाई नागरिक अधिकारियों को रिश्वत देकर बाहर के कंटेंट का इस्तेमाल कर पा रहे थे, लेकिन हाल के वर्षों में सरकार ने और भी सख्ती बढ़ा दी है. घरेलू छापों के माध्यम से ‘एंटी-सोशलिस्ट’ कंटेंट को पकड़ने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स सक्रिय है. फिर भी, कई उत्तर कोरियाई लोग गुप्त रूप से प्रतिबंधित कंटेंट को USB स्टिक और अवैध रेडियो प्रसारण के जरिए देख और सुन रहे हैं.

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