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सत्य निकेतन हादसे पर महुआ मोइत्रा का कटाक्ष, DU के पूर्व छात्रों से पूछा- अब तक खामोश क्यों?

 

नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत गिरने की घटना के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष इस हादसे को लेकर दिल्ली और केंद्र सरकार की व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है। इसी बीच तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों पर निशाना साधा है।

महुआ मोइत्रा ने सवाल उठाया कि दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़े लोग सत्य निकेतन में जान गंवाने वाले छात्रों की मौत पर अपनी आवाज क्यों नहीं उठा रहे हैं। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या पेरिस में बने एक मंदिर का उद्घाटन इन युवाओं की मौत के मुद्दे से ज्यादा महत्वपूर्ण है।

पेरिस के मंदिर का जिक्र कर क्यों साधा निशाना?

महुआ मोइत्रा का यह बयान हाल ही में पेरिस में बने बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर के उद्घाटन के संदर्भ में आया है। इस मंदिर का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया था।

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर मंदिर को भारत और फ्रांस के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण प्रतीक बताया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें समय-समय पर ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों से जुड़ने का अवसर मिलता रहता है।

इसी संदर्भ को लेकर महुआ मोइत्रा ने सत्य निकेतन हादसे और मंदिर उद्घाटन के बीच तुलना करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों की चुप्पी पर सवाल उठाया।

सत्य निकेतन हादसे में सात लोगों की मौत

सत्य निकेतन में इमारत गिरने की इस घटना में अब तक सात लोगों की जान जा चुकी है। मृतकों में बड़ी संख्या छात्रों की बताई गई है। ये छात्र देश के अलग-अलग हिस्सों से बेहतर भविष्य और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने की उम्मीद में दिल्ली आए थे।

इस हादसे ने राजधानी में जर्जर और असुरक्षित इमारतों की स्थिति को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल्ली में पिछले कुछ समय के दौरान कई इलाकों में भवन गिरने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

रोहिणी, साकेत, वेलकम, करोल बाग, पहाड़गंज और मुस्तफाबाद समेत कई इलाकों में इमारत ढहने की घटनाएं हुई हैं। इस साल मई में साकेत मेट्रो स्टेशन के नजदीक पांच मंजिला इमारत गिरने से छह लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद जुलाई में रोहिणी सेक्टर-16 में हुए हादसे में तीन मजदूरों की मलबे में दबने से मौत हो गई थी।

दिल्ली हाई कोर्ट ने कई संस्थाओं को भेजा नोटिस

सत्य निकेतन हादसे को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने भी मामले का संज्ञान लिया है। अदालत ने दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार, नगर निगम, पुलिस, दिल्ली विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को नोटिस जारी किया है।

अदालत ने दिल्ली विश्वविद्यालय से यह जानकारी भी मांगी है कि उसके कॉलेजों में देश के दूसरे हिस्सों से आकर पढ़ने वाले छात्रों की संख्या कितनी है। इसके साथ ही विश्वविद्यालय और उसके कॉलेजों की ओर से संचालित हॉस्टलों से जुड़ा विवरण भी मांगा गया है।

मामले की अगली सुनवाई 25 तारीख को होनी है। अब अदालत की सुनवाई के दौरान सामने आने वाले तथ्यों से यह स्पष्ट होगा कि सत्य निकेतन हादसे में जिम्मेदारी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

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