नई दिल्ली। भारत ने अपनी सैन्य क्षमताओं को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने करीब 1.10 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले पूंजीगत रक्षा खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में सशस्त्र बलों की जरूरतों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को ‘आवश्यकता की स्वीकृति’ (AoN) प्रदान की गई।
इस मंजूरी के बाद भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए आधुनिक उपकरणों और प्रणालियों की खरीद का रास्ता साफ होगा। सरकार का जोर सैन्य आधुनिकीकरण के साथ-साथ घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने पर भी है।
सेना के लिए कई आधुनिक उपकरणों की खरीद
भारतीय सेना की परिचालन क्षमता बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रणालियों की खरीद को मंजूरी मिली है। इनमें केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल एंड न्यूक्लियर (CBRN) रेकी वाहन, हाई मोबिलिटी व्हीकल (HMV), सेल्फ-प्रोपेल्ड मैकेनिकल माइन लेयर्स (MML), एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH), ट्रॉवेल टैंक और ‘सर्वत्र’ ब्रिज सिस्टम शामिल हैं।
CBRN रेकी वाहन ऐसे इलाकों में काम करेंगे जहां रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल या परमाणु प्रदूषण का खतरा हो। इनकी मदद से प्रभावित क्षेत्र का पता लगाने, संदूषण की पहचान करने, निगरानी रखने और उस स्थान को चिन्हित करने में मदद मिलेगी।
वहीं हाई मोबिलिटी व्हीकल कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में सेना की आवाजाही और लॉजिस्टिक सपोर्ट को बेहतर बनाने में उपयोगी होंगे।
बारूदी सुरंग बिछाने और नदी-पार अभियानों में मिलेगी मदद
सेल्फ-प्रोपेल्ड मैकेनिकल माइन लेयर्स के जरिए चुनौतीपूर्ण इलाकों में तेजी से बारूदी सुरंगें बिछाने की क्षमता बढ़ेगी। इससे सेना को संभावित सैन्य परिस्थितियों में तेजी से प्रतिक्रिया देने में सहायता मिलेगी।
एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टरों को भी मंजूरी दी गई है। इनका इस्तेमाल भारतीय सेना और वायुसेना विभिन्न इलाकों और अलग-अलग ऑपरेशनल परिस्थितियों में जटिल अभियानों के लिए कर सकेंगी।
इसके अलावा ट्रॉवेल टैंक और ‘सर्वत्र’ ब्रिज सिस्टम को भी मंजूरी मिली है। इन प्रणालियों की मदद से कठिन इलाकों में सैन्य टुकड़ियों और लड़ाकू वाहनों के लिए रास्ता तैयार करने में सहायता मिलेगी।
नौसेना को भी मिलेंगी नई क्षमताएं
नौसेना से जुड़े प्रस्तावों में अरुध्रा रडार की खरीद को भी मंजूरी दी गई है। यह रडार नौसेना के विभिन्न एयर स्टेशनों पर मौजूद पुराने एयर रूट सर्विलांस रडार की जगह लेगा।
इसके साथ ही मरीन गैस टर्बाइन (MGT) के डिजाइन और विकास तथा आगे इसकी खरीद के लिए भी AoN प्रदान किया गया है। युद्धपोतों की प्रणोदन प्रणाली में इस्तेमाल होने वाली यह तकनीक देश की समुद्री रक्षा क्षमता को मजबूत करने के साथ विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता घटाने में मदद कर सकती है।
वायुसेना के लड़ाकू विमानों और हेलीकॉप्टरों की क्षमता बढ़ाने पर जोर
बैठक में भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों, परिवहन विमानों और हेलीकॉप्टरों की ऑपरेशनल क्षमता बढ़ाने से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।
इसके अलावा ग्राउंड-बेस्ड मल्टी-पर्पज जैमर (GBMPJ) से जुड़े प्रस्ताव को भी स्वीकृति मिली है। यह प्रणाली दुश्मन के रडार और संबंधित इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों के खिलाफ जैमिंग क्षमता उपलब्ध कराने के लिए उपयोग की जाएगी।
RFID स्मार्ट कार्ड से बदले जाएंगे पुराने पहचान पत्र
रक्षा बलों के लिए डिफेंस फोर्सेज सिक्योर एक्सेस कार्ड (DEFSAC) सिस्टम को भी मंजूरी दी गई है। इसके लागू होने के बाद कागज पर आधारित पहचान पत्र, पास और परमिट की जगह इंटरऑपरेबल RFID आधारित स्मार्ट कार्ड सिस्टम इस्तेमाल किया जाएगा।
इससे रक्षा प्रतिष्ठानों में प्रवेश और पहचान सत्यापन की व्यवस्था को अधिक आधुनिक और सुरक्षित बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
98 फीसदी खरीद भारतीय उद्योगों से
रक्षा खरीद परिषद की इस बैठक की सबसे महत्वपूर्ण बात घरेलू रक्षा उद्योग को प्राथमिकता देना भी है। स्वीकृत किए गए कुल AoN प्रस्तावों में से करीब 98 फीसदी खरीद भारतीय उद्योगों से किए जाने का प्रावधान है।
सरकार के इस कदम से देश में रक्षा उपकरणों के उत्पादन को बढ़ावा मिलने और आयात पर निर्भरता कम करने की उम्मीद है। यह फैसला ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत देश की स्वदेशी रक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Zaman Times