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कोर्ट में खुली जांच रिपोर्ट की चूक, मृत महिला का बयान शामिल होने पर कार्रवाई के निर्देश

 

बस्ती में एक न्यायिक सुनवाई के दौरान सामने आए मामले ने जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अदालत ने उस पुलिस जांच रिपोर्ट को गंभीरता से लिया है, जिसमें एक ऐसी महिला का बयान दर्ज बताया गया, जिसकी मृत्यु कथित तौर पर करीब डेढ़ वर्ष पहले हो चुकी थी।

यह मामला ओमप्रकाश और अन्य पक्षकारों से जुड़े एक वाद की सुनवाई के दौरान सामने आया। अदालत ने पहले संबंधित थाने से पूरे मामले की जांच रिपोर्ट मांगी थी। बाद में प्रस्तुत रिपोर्ट में बताया गया कि घायल पक्ष सहित कई लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं।

सुनवाई के दौरान विपक्षी पक्ष ने अदालत में आपत्ति दाखिल करते हुए दावा किया कि रिपोर्ट में जिस महिला का बयान दर्ज दिखाया गया है, उनका निधन काफी पहले हो चुका था। इस दावे के समर्थन में अदालत के समक्ष अन्य न्यायिक अभिलेख और संबंधित दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए।

दस्तावेजों की समीक्षा के बाद अदालत ने संबंधित जांच अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा। जवाब में अधिकारी ने इसे अनजाने में हुई त्रुटि बताया।

हालांकि अदालत ने मामले को साधारण गलती मानने के बजाय इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना। न्यायालय ने टिप्पणी की कि जांच प्रक्रिया में इस प्रकार की त्रुटियां न्यायिक व्यवस्था और तथ्यों की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती हैं।

अदालत ने पुलिस अधीक्षक को मामले की जांच कर आवश्यक विभागीय और दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही निर्धारित समयसीमा के भीतर नई और निष्पक्ष जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।

इसके अतिरिक्त, आदेश की प्रतियां उच्च पुलिस अधिकारियों को भी भेजने के निर्देश दिए गए हैं ताकि मामले की निगरानी और आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

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