तेलंगाना में नगर निकाय अध्यक्षों के चुनाव के दौरान जनगांव में हाई-वोल्टेज सियासी ड्रामा देखने को मिला। सोमवार सुबह करीब 10:15 बजे जनगांव नगर पालिका कार्यालय के बाहर उस समय हंगामा खड़ा हो गया, जब बीआरएस की नवनिर्वाचित पार्षद हफीज फातिमा को पुलिस ने अंदर जाने से रोक दिया।
पुलिस का कहना था कि उन्हें पार्षद के कथित ‘अपहरण’ की शिकायत मिली है। हालांकि हफीज फातिमा मौके पर ही मीडिया और समर्थकों के सामने कहती रहीं कि वे सुरक्षित हैं और अपनी मर्जी से मतदान करने आई हैं। इस दौरान पुलिसकर्मियों ने उन्हें हिरासत में लेने की कोशिश की, जिससे माहौल और गरमा गया। आखिरकार पार्षद पुलिस घेरा तोड़कर कार्यालय के भीतर पहुंचीं।
पुलिस का दावा बनाम पार्षद का आरोप
पुलिस ने स्पष्ट किया कि वे शिकायत के आधार पर पार्षद को ‘सुरक्षित’ रखने पहुंचे थे। लेकिन हफीज फातिमा ने आरोप लगाया कि उन्हें जानबूझकर मतदान से रोका जा रहा है। उनका कहना था, “मैं बीआरएस के साथ हूं, मेरा अपहरण नहीं हुआ है। मैं अपनी पार्टी के लिए वोट डालने आई हूं, मुझे क्यों रोका जा रहा है?”
कांग्रेस पर पक्षपात के आरोप
बीआरएस नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस निष्पक्ष भूमिका निभाने के बजाय कांग्रेस कार्यकर्ताओं की तरह व्यवहार कर रही है। मामला केवल जनगांव तक सीमित नहीं रहा। थोरूर नगर पालिका चुनाव को लेकर भी तनाव बढ़ गया।
बताया गया कि पेंबर्ती बाईपास पर कांग्रेस सांसद चमाला किरण कुमार रेड्डी और उनके समर्थकों ने बीआरएस पार्षदों की बस को रोक लिया। इसके बाद पूर्व मंत्री एर्राबल्ली राव और उनके समर्थकों के साथ तीखी झड़प और धक्का-मुक्की हुई। हालात इतने बिगड़े कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर घंटों यातायात बाधित रहा। बाद में भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बस को थोरूर रवाना किया गया।
‘नंबर गेम’ ने बढ़ाया तनाव
पूरे घटनाक्रम के पीछे अध्यक्ष पद के लिए चल रहा ‘नंबर गेम’ बताया जा रहा है। जनगांव नगर पालिका में त्रिशंकु परिणाम आए हैं—बीआरएस के 13, कांग्रेस के 12 और 5 निर्दलीय पार्षद। ऐसे में एक-एक वोट की अहमियत काफी बढ़ गई है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि इसी कारण कैंप पॉलिटिक्स, आरोप-प्रत्यारोप और कथित अपहरण जैसे विवाद सामने आ रहे हैं। यह घटनाक्रम चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रहा है।
Zaman Times