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G7 बैठक और डिनर के मौके पर पेरिस में… मैक्रों ने ग्रीनलैंड पर ट्रंप को दो प्रस्ताव दिए, खुलासा हुआ

 

ग्रीनलैंड से जुड़े विवाद पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बातचीत हुई. ट्रंप ने इमैनुएल मैक्रों के टेक्स्ट मैसेज का स्क्रीनशॉट को सार्वजनिक कर दिया. इसमें मैक्रों ने सीरिया और ईरान को लेकर की गई अमेरिकी कोशिशों की सराहना करते हुए ग्रीनलैंड पर मिलकर बात करने की बात कही थी.

इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप को प्राइवेट मैसेज भेजने में सावधानी बरतें, नहीं तो फिर आपके बारे में बढ़ा-चढ़ा कर बताया जाएगा. मैक्रों ने कहा कि उन्हें ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की रणनीति समझ नहीं आ रही है, जिसे ट्रंप किसी भी कीमत पर हथियाने की धमकी दे रहे हैं. चैट में मैक्रों ने 2 प्रस्ताव रखे. पहला- गुरुवार (22 जनवरी 2026) पेरिस में G7 की मीटिंग रखी जाए, जिसमें मैं यूक्रेन, डेनमार्क, सीरिया और रूस को भी बातचीत के लिए राजी कर सकता हूं. दूसरा- आपके अमेरिका वापस जाने से पहले 22 जनवरी को पेरिस में साथ में डिनर करते हैं.

मैक्रों ने चैट में लिखा ‘मेरे दोस्त’

फ्रांस के राष्ट्रपति सार्वजनिक रूप से डोनाल्ड ट्रंप को कई बार अपना दोस्त बता चुके हैं. दोनों नेताओं के बीच कुछ बैठकें अच्छी भी रहीं. हालांकि दोनों नेताओं ने बीते कुछ दिनों में एक-दूसरे पर निशाना साधा है. खासकर ट्रंप ने राजनयिक प्रयासों और एनर्जी के मुद्दे को लेकर फ्रांस पर निशाना साधा. सोमवार (19 जनवरी 2026) को फ्रांस ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के प्रस्तावित गाजा ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने से इनकार कर दिया. इस पर ट्रंप ने कहा, ‘कोई भी उन्हें नहीं चाहता क्योंकि वे बहुत जल्द पद से हट जाएंगे.’ फिर उन्होंने फ्रांसीसी वाइन और शैम्पेन पर 200 फीसदी टैरिफ लगाने की धमकी दी.

मैक्रों के सीरिया मुद्दे पर सहमत होने का मतलब

सीरिया डोनाल्ड ट्रंप और इमैनुएल मैक्रों के बीच सहमति का क्षेत्र है. दोनों नेता अल-कायदा के पूर्व सदस्य अहमद अल-शारा को सीरिया के नेता के रूप में समर्थन देते हैं. ट्रंप और मैक्रों दोनों ही नेता सीरिया को प्रमुखता देते हैं क्योंकि अपने मतभेदों को छिपाने का ये उनके पास सबसे बेहतर तरीका है. यूरोप में दक्षिणपंथी आंदोलनों के लिए वाशिंगटन का समर्थन, इजरायल-गाजा युद्ध, जलवायु परिवर्तन और संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को इसके उदाहरण के रूप में समझा जा सकता है.

हम ईरान के मामले में बहुत कुछ कर सकते हैं: मैक्रों

ये एक ऐसा मुद्दा है जिस पर फ्रांस और अमेरिका बहुत हद तक सहमत हैं. जी7 देशों ने ईरान को प्रतिबंधों की धमकी दी है यदि तेहरान में प्रदर्शनकारियों पर खूनी कार्रवाई जारी रहती है और यूरोपीय संघ भी अतिरिक्त प्रतिबंधों पर विचार कर रहा है. हालांकि फ्रांस ईरान पर बमबारी का समर्थन नहीं करते, जबकि ट्रंप ने ऐसा करने की धमकी दी है. जरूरी बात ये है कि पेरिस ने ईरान के साथ परमाणु समझौते को तैयार करने में मदद की थी, जिससे ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान खुद को अलग कर लिया था.

ग्रीनलैंड पर फ्रांस के राष्ट्रपति के बयान का मतलब

मैक्रों ने ट्रंप को कहा, ‘मुझे समझ नहीं आ रहा कि आप ग्रीनलैंड में क्या कर रहे हैं?’ इस मुद्दे पर ट्रंप के साथ सीधी बातचीत में मैक्रों ने पहली बार नरमी दिखाई. ग्रीनलैंड पर अमेरिकी राष्ट्रपति की योजनाओं का समर्थन न करने वाले यूरोपीय सहयोगियों पर टैरिफ लगाने की ट्रंप की धमकियों के जवाब में फ्रांस ने सार्वजनिक रूप से कहीं अधिक आक्रामक रुख अपनाया है. मैक्रों ने यूरोपीय यूनियन से अपने एंटी ट्रेड टूल्स को लागू करने का आग्रह किया है, जबकि जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ जैसे अन्य नेता कूटनीति को मौका देना चाहते हैं.

यूक्रेन, डेनमार्क, सीरिया और रूस पर दिए बयान का अर्थ

मैक्रों की ओर से यूक्रेन और डेनमार्क के साथ-साथ रूस को भी पेरिस में होने वाली जी7 बैठक में आमंत्रित करने की स्पष्ट इच्छा से यूरोपीय लोगों के बीच चिंताएं बढ़ने की संभावना है. फ्रांस के राष्ट्रपति ने बार-बार कहा है कि अमेरिका, यूक्रेन और रूस के बीच शांति वार्ता के बाद यूरोपीय देशों को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत फिर से शुरू करनी चाहिए. हालांकि, यूरोपीय देशों में इस बात पर मतभेद है कि इन वार्ताओं का नेतृत्व कौन करेगा और क्या यूरोपीय विशेष दूत का पद बनाना चाहिए, क्योंकि मॉस्को लगातार यूक्रेन पर बमबारी कर रहा है.

पेरिस में हो रही जी7 बैठक में रूस को आमंत्रित करना, पुतिन की शांति वार्ता को गंभीरता से लेने का कोई संकेत दिए जाने से पहले ही मॉस्को की छवि सुधारने के प्रयास के रूप में देखा जा सकता है. यह एक जोखिम भरा दांव है.

दावोस के बाद पेरिस में जी7 की बैठक का अर्थ

मैक्रों ने चैट में कहा था, ‘मैं गुरुवार दोपहर को दावोस के बाद पेरिस में जी7 की बैठक आयोजित कर सकता हूं.’ पॉलिटिको की रिपोर्ट के मुताबिक फ्रांस के अधिकारी ने इसे लेकर बताया, ‘ऐसा हो सकता है कि मैक्रों एक ऐसी बैठक का प्रस्ताव दे रहे होंगे जो ब्रुसेल्स में गुरुवार शाम को होने वाले यूरोपीय संघ के नेताओं के आपातकालीन शिखर सम्मेलन से सीधे टकराती.’

ट्रम्प की टैरिफ धमकी का जवाब यूरोपीय संघ के पास है, लेकिन इसमें ब्रिटेन शामिल नहीं है, जो यूक्रेन के लिए सुरक्षा गारंटी और ग्रीनलैंड की सुरक्षा पर चर्चा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. फ्रांस की ओर से जी-7 प्रारूप का प्रस्ताव रखे जाने की संभावना है क्योंकि वह समूह की रोटेशन अध्यक्षता कर रहा है और इसमें ब्रिटेन-कनाडा जैसे प्रमुख देश शामिल हैं. यूरोपीय रक्षा और सुरक्षा पर चर्चा करने के लिए नाटो आमतौर पर एक विशेष मंच है, लेकिन यह वास्तव में एक सदस्य द्वारा दूसरे को धमकी देने की स्थिति से निपटने के लिए नहीं बना है.

ट्रंप के साथ डिनर क्या मतलब हो सकता है?

पेरिस में एक डिनर कार्यक्रम का आयोजन ट्रंप का दिल जीतने का एक तरीका हो सकता है. यूरोपीय लोगों को लगता है कि भव्य समारोह अमेरिकी राष्ट्रपति को खुश कर देती है. मैक्रोन ने “डिनर डिप्लोमेसी” में भी महारत हासिल कर ली है, जिसके तहत उन्होंने मतभेदों को सुलझाने के प्रयास में हंगरी के विक्टर ओर्बन को कई बार पेरिस में रात्रिभोज के लिए आमंत्रित किया है. मैक्रों ने डिनर डिप्लोमेसी में भी महारत हासिल कर ली है, जिसके तहत उन्होंने मतभेदों को सुलझाने के प्रयास में हंगरी के विक्टर ओर्बन को कई बार पेरिस में रात्रिभोज के लिए आमंत्रित किया है.

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