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महाराष्ट्र राजनीति की पोल खोलती 6 फिल्में, 1 ने तो हिला दिया था प्रदेश

 

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सिंघासन

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में आज का दिन सबसे महत्वपूर्ण है। सुबह 7 बजे से ही चुनावों के परिणाम आने शुरू हो गए हैं और चंद घंटों में सियासी तस्वीर साफ होने वाली है। चुनाव परिणामों के दिन महाराष्ट्र की राजनीति का विश्लेषण भी जोरों से चल रहा है। ऐसे में हम आपको बताते हैं वो 6 फिल्में जो महाराष्ट्र की सियासत की पोल खोलती हैं। इन फिल्मों में मेकर्स ने राजनीति और पर्दे के पीछे होने वाली सनसने फैसलों पर दर्शकों का ध्यान खींचती हैं। इन फिल्मों को आईएमडीबी पर भी अच्छी रेटिंग दी गई थी।

1-चंद्रमुखी: साल 2022 में रिलीज हुई फिल्म चंद्रमुखी को डायरेक्टर प्रसाद ओक ने बनाया था। 80 के दशक में सेट इस पॉलिटिकल म्यूजिकल ड्रामा को लोगों ने खूब पसंद किया था। इस फिल्म में महाराष्ट्र की सियासत में चलने वाली चालों और षड़यंत्रों का खुलासा किया था। फिल्म की कहानी एक ऐसे व्यक्ति की थी जो इंडस्ट्रियल मिनिस्टर बनना चाहता है, क्योंकि वर्तमान मिनिस्टर की मौत हो गई थी। लेकिन इससे पहले ही एक एक्सट्रामेरिटल अफेयर को लेकर सियासत गरमा जाती है और कहानी दिलचस्प हो जाती है। फिल्म को आईएमडीबी पर 7.3 रेटिंग भी दी गई है।

2-सिंघासन: साल 1979 में बनी इस फिल्म को जब्बार पटेल ने डायरेक्ट किया था। महाराष्ट्र की राजनीति में अब तक की बनी सभी फिल्मों से टॉप मानी जाती है। फिल्म को आईएमडीबी पर 8.4 की रेटिंग दी गई है। फिल्म की कहानी एक मुख्यमंत्री से शुरू होती है। जिसके पास एक अंजान फोन आता है जो विपक्षी खेमे के कुछ लोगों द्वारा उनकी पार्टी में षड़यंत्र की जानकारी देता है। जिसके बाद सियासी गलियारों में हलचल होने लगती है।

3-लोकशाही: इसी साल रिलीज हुई मराठी फिल्म लोकशाही भी सियासी चालबाजी पर एक जोरदार हमला करती है। फिल्म में एक लड़की है जो काफी अतरंगी स्वभाव की है। इस लड़की के एक्शन्स के बाद महाराष्ट्र की सियासत में भूचाल आ जाता है। इस फिल्म को आईएमडीबी पर 9.1 की रेटिंग दी गई है।

4-मौर्या: इसी साल रिलीज हुई ये फिल्म भी सियासी चलाबाजी की पोल खोलती है। कहानी एक गांव से शुरू होती है। इस गांव में एक सफाईकर्मी है जो अपने काम को काफी गंभीरता से करता है। जिसके लिए उसकी काफी तारीफ भी होती है। इस फिल्म की कहानी उस वक्त बदलने लगती है जब एक बड़ा नेता उस सफाई कर्मी को ग्राम पंचायत अध्यक्ष का चुनाव लड़ने की बात करता है। इसके बाद इस कहानी का मर्म बदलने लगता है और गंदी राजनीति खुलकर सामने आने लगती है। इस फिल्म को भी आईएमडीबी पर 9.1 रेटिंग दी गई है।

5-द बॉय इन द रेंच: साल 2993 में रिलीज हुई ये फिल्म ‘राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ’ की कहानी बताती है। महाराष्ट्र के नागपुर शहर में बने आरएसएस के हेडक्वार्टर में चंद लड़के कैसे सियासी मंसूबों के लिए अपने कर्तव्यों का निर्वाहन करते हैं। साथ ही युवाओं में देश और समाज के प्रति त्याग को दिखाता है। इस फिल्म को भी लोगों ने खूब पसंद किया था। फिल्म को आईएमडीबी पर 8 रेटिंग दी गई है।

6-ठाकरे: महाराष्ट्र की सियासत का सबसे बड़ा नाम माने जाने वाले बाला साहेब ठाकने की जिंदगी पर बनी फिल्म ठाकरे 2019 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म ने कमाल कर दिया था। फिल्म ने नवाजुद्दीन सिद्दीकी की किस्मत चमका दी थी। फिल्म ने प्रदेश की सियासत में भी काफी हलचल लाई थी। हालांकि इस फिल्म को आईएमडीबी पर 5.4 की खराब रेटिंग मिली है।

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